अन्धविश्वास

अंधविश्वास क्या है और कैसे फैलता है ?

दोस्तों, आज के इस बदलते हुए सामाजिक परिवेश और सामाजिक व्यवस्था में हम देख रहे हैं लोग अपने पुराने रीति रिवाजों और कर्मो को भूलते चले जा रहे हैं और आज चल रहे अन्धविश्वास में जी रहे हैं मै समझता हूँ ये बहुत गलत बात है|आज के दौर में अंधविश्वास एक बहुत जटिल समस्या बन गयी है ये किसी अभिशाप से कम नही है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको अभिशाप पर ही एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ| वैसे आप सभी को जानना बहुत जरुरी है कि अंधविश्वास क्या होता है और क्या है और ये समाज में और पूरे देश में कैसे फैलता है| आज हम सभी विस्तार से जानेगे| तो आइये जानते हैं और पढ़ते हैं|

अंधविश्वास क्या है ?

दोस्तों, अंधविश्वास क्या है अगर बात हो तो मै आपको बताऊ अंधविश्वास का सीधा अर्थ है आँख मूद कर विश्वास कर लेना या बिना जाने समझे किसी चीज़ पर विश्वास कर लेना ही अंधविश्वास कहलाता है| आपको बताये सामाजिक तौर पर पुरानी रुढ़िवादी विचारों से प्रभावित होकर किये जाने वाले कार्यों को जिसमे कारण अज्ञात होता है उसी को अंधविश्वास कहा जाता है| अब आइये हम जानते हैं कैसे ये समाज को प्रभावित करता है फैलता है|

अंधविश्वास और कुप्रथा (हिंदी कहानी)

बहुत समय पहले की बात है किसी गाँव में एक मंदिर हुआ करता था| उस मंदिर में एक पुजारी थे जो बहुत ही सज्जन और विद्वान थे| एक दिन पुजारी जी मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे थे कि अचानक कहीं से एक छोटा कुत्ता मंदिर में घुस आया| वह छोटा सा कुत्ता बहुत भूखा और प्यासा लग रहा था| पुजारी जी को बहुत दया आई और उन्होंने पूजा बीच में ही रोककर उस कुत्ते को खाना खिलाया और पानी दिया| अब पुजारी जी फिर से पूजा करने बैठ गए लेकिन कुत्ता वहां से नही गया|

कुत्ता अपनी पूंछ हिलाते हुए पुजारी जी की गोद में बैठने की कोशिश करने लगा| पुजारी जी ने अपने शिष्य को बुलाया और कहा जब तक मेरी पूजा संपन्न न हो इस कुत्ते को बाहर पेड़ से बांध दो| शिष्य ने वैसा ही किया|

अब वह छोटा कुत्ता मंदिर में ही रहने लगा और जब भी पुजारी जी पूजा करते वो गोद में बैठने की कोशिश करता और हर बार पुजारी जी उसे पेड़ से बंधवा देते| अब यही क्रम रोज चलने लगा|

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एक दिन अकस्मात् पुजारी जी की मृत्यु हो गयी| इसके बाद उनके शिष्य को पुजारी बनाया गया अब वो शिष्य जब भी पूजा करता तो कुत्ते को पेड़ से बांध देता| एक दिन एक हादसा हुआ कि उस कुत्ते की भी मृत्यु हो गयी| अब मंदिर के सभी सदस्यों और शिष्यों ने आपस में एक मीटिंग की और सोचा कि हमारे गुरूजी जब भी पूजा करते थे तो कुत्ते को पेड़ से बंधवाते थे| अब कुत्ते की मृत्यु हो चुकी है लेकिन पूजा करने के लिए किसी कुत्ते को पेड़ से बांधना बहुत जरुरी है क्योंकि हमारे गुरूजी भी ऐसा करते थे|

बस फिर क्या था गाँव से एक नए काले कुत्ते को लाया गया और पूजा होते समय उसे पेड़ से बांध दिया जाता| आपको विश्वास नही होगा कि उसके बाद न जाने कितने ही पुजारियों की मृत्यु हो चुकी थी और न जाने कितने ही कुत्तों की मृत्यु हो चुकी थी लेकिन अब ये एक परंपरा बन चुकी थी| पूजा होते समय पुजारी पेड़ से एक कुत्ता जरुर बंधवाता था|

जब कोई व्यक्ति इस बात को पुजारी से पूछता तो वो बोलते की हमारे पूर्वज भी ऐसा ही किया करते थे ये हमारी एक परम्परा रही है|

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दोस्तों, आपको बताये इसी तरह हमारे समाज में भी ऐसे ही न जाने कितने अंधविश्वास पाल लिए जाते हैं| हमारे पूर्वजों ने जो किया वो हो सकता है उस समय उन चीजों का कुछ विशेष कारण रहा हो लेकिन आज हम उसे एक परम्परा मान लेते हैं| आपको बताये ये केवल किसी एक विशेष व्यक्ति की बात नही है बल्कि हमारे समाज में हर इंसान कुछ न कुछ अंधविश्वास जरुर मानता है और जिससे भी पूछो यही कहता है कि ये तो हमारी परम्परा है हमारे यहाँ सदियों से चली आई है|आप सभी भी दिमाग से काम करो और इन सारी रुढ़िवादी विचारों से ऊपर उठकर जियें और जीने दे|

दोस्तों मै उम्मीद के साथ कह सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा अगर आप मेरे द्वारा लिखे इस पोस्ट को अच्छे से पढ़े होंगे तो मै बताऊ आपको समझ में आ गया होगा|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message के द्वारा पूछ सकते हैं|

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