कबीरदास का जीवन परिचय

दोस्तों, कबीरदास जी के बारे में सभी जानते हैं और पढ़ते चले आ रहे हैं|कबीरदास जी एक ऐसे संत और कवि हुए हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य को एक नया आयाम दिया और अमर हो गये|उनकी रचनाएँ अजर और अमर हैं|कबीरदास जी प्रतिभा के धनी और एक अच्छे समाज सुधारक भी रहे हैं|कबीरदास जी भक्तिकाल के एक ऐसे कवि रहे हैं जो समाज को भी नया मोड़ दिया और भेदभाव को दूर किये|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आप सभी को संत कबीर के बारे में बताने जा रहा हूँ|दोस्तों साथ ही मै आपको कबीरदास जी की रचनाओं के बारे में बताऊंगा|आप सभी कबीरदास जी की कवितायेँ पढ़े होंगे और जीवन परिचय भी पढ़ा होगा|

कबीरदास जी का जीवन परिचय

आज हम सभी कबीर जी की साहित्यिक विशेषताएं भी बता रहा हूँ|वैसे आपको बताऊ कबीरदास जी के जन्म को लेकर बहुत सारे विचार हैं और सभी अपने अलग अलग विचार प्रकट करते हैं|कुछ लोगों के अनुसार वे रामानन्द स्वामी के आशीर्वाद से काशी की एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से पैदा हुए थे, जिसको भूल से रामानंद जी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था|ब्राह्मणी उस नवजात शिशु को लहरतारा ताल के पास फेंक आयी|लेकिन आज मै आपको सही जानकारी दूंगा जो सही कहा जा सकता है आइये जानते हैं|

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कबीरदास जी का जीवन परिचय –

दोस्तों आपको बताता चलूँ कबीरदास जी सिकन्दर लोदी के समकालीन थे|कबीर का अर्थ अरबी भाषा में महान होता है|कबीरदास भारत के भक्ति काव्य परंपरा के महानतम कवियों में से एक थे|भारत में धर्म, भाषा या संस्कृति किसी की भी चर्चा बिना कबीर की चर्चा के अधूरी ही रहेगी|कबीरपंथी, एक धार्मिक समुदाय जो कबीर के सिद्धांतों और शिक्षाओं को अपने जीवन शैली का आधार मानते हैं|

पूरा नाम – संत कबीरदास|

जन्म – सन 1398|

जन्म स्थान – लहरतारा ताल, काशी|

माता – पिता – नीरू और नीमा|

पत्नी – लोई|

संतान – पुत्र – कमाल, पुत्री – कमाली|

रचनाएँ – साखी, सबद और रमैनी|

मृत्यु – सन 1518|

मृत्यु स्थान – मगहर, उत्तर प्रदेश|

कबीरदास जी का जीवन परिचय

दोस्तों कबीर पन्थियों की मान्यता है कि कबीर का जन्म काशी में लहरतारा तालाब में उत्पन्न कमल के मनोहर पुष्प के ऊपर बालक के रूप में हुआ|कुछ लोगों का कहना है कि वे जन्म से मुसलमान थे और युवावस्था में स्वामी रामानंद के प्रभाव से उन्हें हिन्दू धर्म की बातें मालूम हुईं|एक दिन, एक पहर रात रहते ही कबीर पंचगंगा घाट की सीढ़ियों पर गिर पड़े|रामानन्द जी गंगा स्नान करने के लिये सीढ़ियाँ उतर रहे थे कि तभी उनका पैर कबीर के शरीर पर पड़ गया|उनके मुख से तत्काल `राम-राम’ शब्द निकल पड़ा|उसी राम को कबीर ने दीक्षा-मन्त्र मान लिया और रामानन्द जी को अपना गुरु स्वीकार कर लिया|

“चौदह सौ पचपन साल गए, चन्द्रवार एक ठाठ ठए,

जेठ सुदी बरसायत को पूरनमासी तिथि प्रगट भए|

घन गरजें दामिनि दमके बूँदे बरषें झर लाग गए,

लहर तलाब में कमल खिले तहँ कबीर भानु प्रगट भए||”

दोस्तों, कबीरदास जी के माता- पिता का नाम “नीमा’ और “नीरु’ आपको बताये इनकी कोख से यह अनुपम ज्योति पैदा हुई थी, या लहर तालाब के समीप विधवा ब्राह्मणी की पाप- संतान के रुप में आकर यह पतितपावन हुए थे, ठीक तरह से कहा नहीं जा सकता है|कई मत यह है कि नीमा और नीरु ने केवल इनका पालन- पोषण ही किया था|एक किवदंती के अनुसार कबीर को एक विधवा ब्राह्मणी का पुत्र बताया जाता है, जिसको भूल से रामानंद जी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था|

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कबीरदास जी की रचनाएँ –

साखी, सबद, रमैनी कबीरदास जी की मुख्य रचनाएँ हैं|बीजक, कबीर रचनावली भी कबीर की रचनाएँ हैं|

दोहे –

“गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूँ पाय

बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय|”

“लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट

पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट|”

“ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोये

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए|”

“बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर

पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर|”

“माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे

एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदुंगी तोहे|”

“पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय|”

“राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय

जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होय|”

“कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय

भक्ति करे कोई सुरमा, जाती बरन कुल खोए|”

“साईं इतना दीजिये, जामे कुटुंब समाये

मैं भी भूखा न रहूँ, साधू न भूखा जाए|”

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दोस्तों, इस तरह आप सभी ने आज इस आर्टिकल के माध्यम से कबीरदास जी के बारे में जाना साथ ही इनके कुछ दोहे और रचनाओं पर प्रकाश डाला|अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये post बेहद अच्छा लगा होगा अगर आप सभी ने मेरे इस post को अच्छे से read किये होंगे तो आपको जरुरी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message box में comment कर बता सकते हैं|दोस्तों अगर आपके पास कोई ऐसी जानकारी है तो हमसे share कर सकते हैं|

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