करवा चौथ 2017 की Date और पूरी जानकारी

दोस्तों, हमारे भारतवर्ष में करवा चौथ का त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाया जाता है|आपको बताये हिन्दुओं यानि हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक करवा चौथ का भी त्यौहार होता है|सभी विवाहित (सुहागिन) महिलाओं के लिये करवा चौथ बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार हैं|ये एक दिन का त्यौहार प्रत्येक वर्ष मुख्यतः उत्तरी भारत की विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है|इस दिन सुहागिन महिलाएँ पूरे दिन का उपवास रखती हैं जो जल्दी सुबह सूर्योदय के साथ शुरु होता है और देर शाम या कभी कभी देर रात को चन्द्रोदय के बाद खत्म होता है|वे अपने पति की सुरक्षित और लम्बी उम्र के लिये बिना पानी और बिना भोजन के पूरे दिन बहुत कठिन व्रत रखती हैं|

करवा चौथ 2017 की Date और पूरी जानकारी

आप सभी जानते हैं करवा चौथ का व्रत कार्तिक हिन्दु माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दौरान किया जाता है|इस बार यानि 2017 में करवा चौथ का त्यौहार 8 अक्टूबर दिन रविवार को पूरे देश में मनाया जायेगा|अमांत पञ्चाङ्ग जिसका अनुसरण गुजरात, महाराष्ट्र, और दक्षिणी भारत में किया जाता है, के अनुसार करवा चौथ अश्विन माह में पड़ता है|वैसे यह केवल माह का नाम है जो इसे अलग-अलग करता है और सभी राज्यों में करवा चौथ एक ही दिन मनाया जाता है|ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक महिलाओं तक सभी नारियाँ करवाचौथ का व्रत बडी़ श्रद्धा एवं उत्साह के साथ रखती हैं|

आपसे बताना चाहूँगा शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए|पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है|करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अ‌र्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है|वर्तमान समय में करवाचौथ व्रतोत्सव ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं लेकिन अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं|अब आइये जानते हैं करवा चौथ की कथा क्या है और इसके पीचे का इतिहास क्या है|

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करवा चौथ –

करवा चौथ 2017 की Date और पूरी जानकारी

 

करवा चौथ 2017 की Date – 8 अक्टूबर 2017.

दिन – रविवार|

समय – करवा चौथ की पूजा शाम 5:54 pm.

समापन – शाम 7:09 pm पर करवा चौथ पूजा करने का समय खत्म होगा|

दोस्तों आपको बताये इस साल करवा चौथ का व्रत भारत में 8 अक्टूबर के दिन रखा जाएगा|इस दिन रविवार है. अकसर यह पर्व अक्टूबर और नवम्बर माह में ही पड़ता है|वर्ष 2012 में यह 2 नवम्बर शुक्रवार को, 2013 में मंगलवार 22 अक्टूबर, वर्ष 2014 में इसे 11 अक्टूबर शनिवार, वर्ष 2015 में 30 अक्टूबर शुक्रवार के दिन व् पिछले वर्ष करवा चौथ 19 अक्टूबर बुधवार को था|हिन्दू पंचाग के अनुसार यह कार्तिक महीने की कृष्ण चतुर्थी के दिन मनाया जाता है. इसका पुण्य प्राप्त करने के लिए सही विधि का प्रयोग किया जाना चाहिए|तभी पति की लम्बी आयु और घर में सुख सम्रद्धि की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है|

करवा चौथ का महात्म –

एक कथा है बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी|सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे|यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे|एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी|शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी|सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है| चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है|

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करवा चौथ 2017 की Date और पूरी जानकारी

उसके बाद सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है|दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो|इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो|बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है|वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है|दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है|वह बौखला जाती है|

दोस्तों उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ|करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है|सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी|वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है|उसकी देखभाल करती है उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है|एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं|जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से ‘यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो’ ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है|

इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है|यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना|ऐसा कह के वह चली जाती है।सबसे अंत में छोटी भाभी आती है|करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है|इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है|भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है|

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अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले|इस तरह अब सभी लोग इस त्यौहार को मनाने लगे|दोस्तों मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा अगर आप मेरे इस आर्टिकल को अच्छे से read किये होंगे तो उम्मीद है आपको करवा चौथ के बारे में अच्छी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message box में comment कर पूछ सकते हैं आपकी जरुर मदद की जाएगी|

 

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