गोवर्धन पूजा 2017 की Date और HD Wallpaper

दोस्तों, गोवर्धन पूजा का त्यौहार हमारे देश में बड़े हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है आप सभी जानते हैं गोवर्धन पूजा दीवाली के दुसरे दिन मनाई जाती है|कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा का त्यौहार सभी हिन्दुओं के प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है|गोवर्धन पूजा को लोग अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं और मनाते हैं|इस त्यौहार का हर जगह बहुत महत्त्व है|इस त्यौहार का प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध माना जाता है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको गोवर्धन पूजा का महत्त्व, गोवर्धन पूजा विधि, गोवर्धन पूजा की कथा और गोवर्धन पूजा की कुछ अच्छी तस्वीर यानि HD wallpaper आप सभी को share कर रहा हूँ|साथ ही आपको बता दें कि इस बार यानि 2017 में गोवर्धन पूजा का त्यौहार हम सभी 20 अक्टूबर दिन शुक्रवार को मनाएंगे|

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आपको बताये गोवर्धन त्यौहार की अपनी मान्यता और लोककथा है|गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है|शास्त्रों के अनुसार  गाय उसी प्रकार पवित्र होती जैसे नदियों में गंगा|गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है|देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं|इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है|इस तरह गौ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है|गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की|अब आइये हम जानते हैं गोवर्धन पूजा कैसे की जाती है और इसकी कथा भी जानते हैं|

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गोवर्धन पूजा का महात्म –

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दोस्तों, शास्त्रों के अनुसार इस दिन वरुण, इंद्र, अग्नि आदि देवताओं की पूजा का विधान है|इसी दिन बलि पूजा, गोवर्धन पूजा, मार्गपाली आदि होते हैं|इस दिन गाय और बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर, फूल माला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है|इतना ही नही गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है|यह ब्रजवासियों का मुख्य त्योहार है|अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापरयुग से प्रारम्भ हुई|उस समय लोग इन्द्र भगवान की पूजा करते थे तथा छप्पन प्रकार के भोजन बनाकर तरह-तरह के पकवान व मिठाइयों का भोग लगाया जाता था|ये पकवान तथा मिठाइयां इतनी मात्रा में होती थीं कि उनका पूरा पहाड़ ही बन जाता था|

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गोवर्धन पूजा की कथा –

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दोस्तों, गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है|कथा यह है कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था|इन्द्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची| प्रभु की इस लीला में यूं हुआ कि एक दिन उन्होंने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे हुए हैं|श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया ” मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं” कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं|मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं|

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तब मैया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है|भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं|अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए|

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आपको बताये लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की|देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी|प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि, सब इनका कहा मानने से हुआ है|तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया|इन्द्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी|इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें|

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इन्द्र लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता अत: वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया|ब्रह्मा जी ने इन्द्र से कहा कि आप जिस कृष्ण की बात कर रहे हैं वह भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं|ब्रह्मा जी के मुंख से यह सुनकर इन्द्र अत्यंत लज्जित हुए और श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा|आप दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल क्षमा करें|इसके पश्चात देवराज इन्द्र ने मुरलीधर की पूजा कर उन्हें भोग लगाया|

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दोस्तों इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी|बृजवासी इस दिन गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं|गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है|गाय और बैलों को गुड़ और चावल मिलाकर खिलाया जाता है|

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दोस्तों इस तरह आज आप सभी ने इस आर्टिकल में गोवर्धन पूजा से जुडी सभी जानकारी प्राप्त की मै उम्मीद के साथ कह सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा अगर आप मेरे इस पोस्ट को अच्छे से read किये होंगे तो आपको जरुरी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message box में comment कर पूछ सकते हैं|

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