गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन परिचय

दोस्तों, गोस्वामी तुलसीदास जी हिंदी साहित्य जगत के ऐसे महान कवि रहे हैं जो कि श्रीरामचरितमानस जैसे महानतम ग्रन्थ की रचना करके वो अमर हो गए|तुलसीदास जी अपने प्रसिद्ध दोहों और कविताओ के लिये जाने जाते है और साथ ही अपने द्वारा लिखित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के लिये वे पूरे भारत में लोकप्रिय है|श्रीरामचरितमानस संस्कृत में रचित रामायण में राम के जीवन की देशी भाषा में की गयी अवधि है|आपको बताये महान कवि तुलसीदास की प्रतिभा-किरणों से न केवल हिन्दू समाज और भारत, बल्कि समस्त संसार आलोकित हो रहा है|दोस्तों बड़ा अफसोस है कि उसी कवि का जन्म-काल विवादों के अंधकार में पड़ा हुआ है|

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय

दोस्तों आपको बताये अब तक प्राप्त शोध-निष्कर्ष भी हमें निश्चितता प्रदान करने में असमर्थ दिखाई देते हैं|मूलगोसाईं-चरित के तथ्यों के आधार पर डा० पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल और श्यामसुंदर दास तथा किसी जनश्रुति के आधार पर “मानसमयंक’ – कार भी 1554 का ही समर्थन करते हैं|इसके पक्ष में मूल गोसाईं-चरित की निम्नांकित पंक्तियों का विशेष उल्लेख किया जाता है|जो कि उनके जन्म की सही जानकारी देते है वो चौपाई है –

“पंद्रह सौ चौवन विषै, कालिंदी के तीर,
सावन सुक्ला सत्तमी, तुलसी धरेउ शरीर|”

गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन परिचय –

गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन परिचय

पूरा नाम – गोस्वामी तुलसीदास जी|

जन्म – 1511 ई० (सम्वत्- 1568 वि०)|

जन्म स्थान – राजापुर, चित्रकूट – उत्तर प्रदेश|

पिता – आत्माराम दुबे|

माता – हुलसी|

पत्नी – रत्नावली|

मृत्यु – 1623 ई|

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गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म 1511 ई में राजापुर, चित्रकूट में हुआ था|आपके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था|तुलसीदास जी बचपन से ही बहुत ज्ञानी रहे हैं|ऐसा कहा जाता है जन्म के समय इनके मुह में पुरे दांत थे, अंत: अशुभ मानकर माता पिता द्वारा त्याग दिये जाने के कारण संत नरहरिदास ने काशी में उनका पालन पोषण किया था|ऐसा कहा जाता है की रत्नावली के प्रेरणा से घर से विरक्त होकर तीर्थ के लिए निकल पडे और तन – मन से भगवान राम की भक्ति में लीन हो गए|उनके द्वारा लिखा गया ‘रामचरितमानस’ हिंदू धर्म की रचना है और उसे घर – घर में आदर प्राप्त हुआ है|

आपको बताये अधिकांश विद्वान तुलसीदास का जन्म स्थान राजापुर को मानने के पक्ष में हैं|यद्यपि कुछ इसे सोरों शूकरक्षेत्र भी मानते हैं|राजापुर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला के अंतर्गत स्थित एक गाँव है|वहाँ आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण रहते थे|उनकी धर्मपत्नी का नाम हुलसी था|संवत् 1554 के श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं दम्पति के यहाँ तुलसीदास का जन्म हुआ|प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु बारह महीने तक माँ के गर्भ में रहने के कारण अत्यधिक हृष्ट पुष्ट था और उसके मुख में दाँत दिखायी दे रहे थे|जन्म लेने के साथ ही उसने राम नाम का उच्चारण किया जिससे उसका नाम रामबोला पड़ गया|उनके जन्म के दूसरे ही दिन माँ का निधन हो गया|पिता ने किसी और अनिष्ट से बचने के लिये बालक को चुनियाँ नाम की एक दासी को सौंप दिया और स्वयं विरक्त हो गये|जब रामबोला साढे पाँच वर्ष का हुआ तो चुनियाँ भी नहीं रही|वह गली-गली भटकता हुआ अनाथों की तरह जीवन जीने को विवश हो गया|

दोस्तों आप सभी जानते हैं कुछ समय के बाद तुलसीदास जी चित्रकूट चले गए और वहां सभी को राम कथा सुनाने लगे|वही पर उनकी भेंट भगवान् श्रीराम चन्द्र जी से हुयी|संवत्‌ 1607 की मौनी अमावस्या को बुधवार के दिन उनके सामने भगवान श्रीराम पुनः प्रकट हुए|उन्होंने बालक रूप में आकर तुलसीदास से कहा-“बाबा! हमें चन्दन चाहिये क्या आप हमें चन्दन दे सकते हैं?” हनुमान ‌जी ने सोचा, कहीं वे इस बार भी धोखा न खा जायें, इसलिये उन्होंने तोते का रूप धारण करके यह दोहा कहा-

“चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीड़,

तुलसीदास चंदन घिसे, तिलक देत रघुवीर|”

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तुलसीदास श्रीराम जी की उस अद्भुत छवि को निहार कर अपने शरीर की सुध-बुध ही भूल गये। अन्ततोगत्वा भगवान ने स्वयं अपने हाथ से चन्दन लेकर अपने तथा तुलसीदास जी के मस्तक पर लगाया और अन्तर्ध्यान हो गये|इस तरह तुलसीदास जी को भगवान् के भी दर्शन हुए और ये कहा जा सकता है कि उनका जन्म ही दुनिया को भगवान् से मिलाने के लिए हुआ था|

रचनाएँ –

दोस्तों गोस्वामी तुलसीदास जी ऐसे महान काव्य की रचना की जिसे भगवान् का रूप माना जाता है सभी भाषाओँ में इस ग्रन्थ के रूप आप सभी को मिल जाएंगे|श्रीरामचरितमानस में कुल 24000 चौपाईयां हैं जो की पढने में बहुत आनंद आता है|

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दोस्तों अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये post बेहद पसंद आया होगा अगर आप सभी ने मेरे इस पोस्ट को अच्छे से read किये होंगे तो सभी को गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन से जुडी हर जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message box में comment कर बता सकते हैं|मैंने अपने website में और भी बहुत से महान लोगों के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला है अगर आप मेरे blog पर visit करेंगे तो आपको बहुत सी छोटी छोटी जानकारी मिलती रहेगी|

 

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