छट पूजा 2017 की Date और पूरी जानकारी

दोस्तों, छट पूजा हमारे देश में बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है|जैसा की आप सभी जानते हैं छठ पूजा एक हिन्दू त्यौहार है जो प्रति वर्ष भारत में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|यह एक बहुत ही प्राचीन त्यौहार है जिसको डाला छठ, डाला पुजा, सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है जिसमे भगवान सूर्य की आराधना की जाती है|साथ ही लोग सूर्य से अपने परिवार के लिए सुख-शांति, सफलता, की कामना करते हैं|हिन्दू संस्कृति के अनुसार सूर्य की कामना एक रोग मुक्त, स्वास्थ्य जीवन की कामना होती होती है|छट पूजा अधिकतर बिहार में मनाया जाता है|छट पूजा के दिन माता छटी की पूजा की जाती है जिनको उषा कहा गया है|आपको बताना चाहूँगा छटी माता सूर्यदेव की पत्नी हैं|इसीलिए इस दिन सूर्यदेव की पूजा का भी विधान है और सभी इस दिन सूर्यदेव की भी पूजा बड़े भाव से करते हैं|

छट पूजा की date और पूरी जानकारी

आपको बताये छठ की रस्म निभाने वाले या पूजा करने वाले उस दिन सुबह बहुत जल्दी उठते हैं|जो लोग गंगा नदी के पास रहते हैं वे गंगा में पवित्र स्नान करते हैं और जो लोग भारत के एनी स्थानों में रहते हैं नदीयों या तालाब में स्नान लेते हैं|वे पूरा दिन उपवास करते हैं और पूरा दिन पानी भी नहीं पीते|उस दिन पूजा करने वाले लोग बहुत ही लम्बे समय तक पानी में आधा शारीर डूबा कर खड़े रहते हैं और सूर्योदय का इंतज़ार करते हैं|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको छट पूजा से जुडी कुछ विशेष जानकारी बताने जा रहा हूँ उम्मीद है आपको बहुत पसंद आयेगा|

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छट पूजा विशेष –

छट पूजा की date और पूरी जानकारी

हम सभी जानते हैं छट पूजा कार्तिक महीने में मनाया जाता है|इस बार यानि 2017 में छट पूजा हम सभी दीवाली के बाद मनाएंगे|आइये विस्तार से जानते हैं कि छट पूजा कब से शुरु होगी और इसका समापन कब करते हैं|वैसे आपको बताये छट पूजा की शुरआत 24 अक्टूबर से शुरू होगा और 27 को समापन होगा|आप सभी जानते हैं छट पूजा का त्यौहार 4 दिन मनाया जाता है|

कार्तिक छट पूजा –

छट पूजा की date और पूरी जानकारी

तारीख                                      दिन                        छट पूजा का शुभ मुहूर्त                तिथि

24 अक्टूबर 2017                   मंगलवार                      नहाय खाय                                  चतुर्थी

25 अक्टूबर 2017                   वुधवार                          लोहंडा और खरना                       पंचमी

26 अक्टूबर 2017                   गुरूवार                         संध्या अर्ध्य                                  षष्टी

27 अक्टूबर 2017                   शुक्रवार                         उषा अर्ध्य, पारन दिन                  सप्तमी

आपको बताये ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से की गयी पूजा से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं यह पर्व पति की लम्बी आयु और संतान प्राप्ति के लिए मनाया जाता है|छठी पूजा का व्रत बड़ी ही निष्ठा से रखा जाता है यह व्रत चार दिन तक किया जाता है|इस व्रत के पहले दिन महिलाएं सेंधा हुआ नमक , कद्दू की सब्जी , चने की दाल और रोटी के साथ भोजन करती है|छठ पूजा का पर्व महाभारत काल में कुंती द्वारा सूर्य देव की आराधना एवं पुत्र कर्ण के जन्म से माना जाता है|एक और कथा के मुताबिक जब लंका विजय के पश्चात रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को प्रभु राम और माता सीता ने व्रत रखा था और सूर्य देव की आराधना की थी|

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कथा –

छट पूजा की date और पूरी जानकारी

दोस्तों, बहुत वर्ष पहले की बात है एक राजा थे जिनका नाम था प्रियव्रत और उनकी पत्नी का नाम था मालिनी|वे बहुत ही ख़ुशी के साथ रहते थे पर उनके जीवन में एक बहुत बड़ा दुख का विषय था कि उनका कोई भी संतान नहीं था|उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप की मदद से एक बहुत ही बड़ा यज्ञ करवाया|यज्ञ के वरदान के कारण रानी मालिनी गर्भवती तो हुई परन्तु नौवे महीने में उसने एक मृत शिशु को जन्म दिया|वैसे राजा यह देख कर आपा खो बैठे और आत्महत्या करने की सोचने लगे और उनके इस दुख को देख कर देवी खाशंती प्रकट हुई और बोली हे राजा चिंता छोड़ो|जो मनुष्य मेरी आराधना सच्चे मन से करता है उसे जरूर संतान की प्राप्ति होती है|यह सुन कर राजा प्रियव्रत ने कड़ी तपस्या किया जिसके कारन उन्हें एक सुन्दर संतान की प्राप्ति हुई|उसके बाद से, लोग छठ पूजा मनाने लगे|

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छटी पूजा गीत –

  • केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेडराय|
  • उगु न सुरुज देव भइलो अरग के बेर|
  • हम करेली छठ बरतिया से उनखे लागी|
  • काँच ही बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए|
  • सेविले चरन तोहार हे छठी मइया। महिमा तोहर अपार|
  • चार कोना के पोखरवा|

दोस्तों छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है जो एक कठिन तपस्या की तरह है|यह छठ व्रत अधिकतर महिलाओं द्वारा किया जाता है कुछ पुरुष भी इस व्रत रखते हैं|व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है|चार दिनों के इस व्रत में व्रति को लगातार उपवास करना होता है|भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता है|पर्व के लिए बनाये गये कमरे में व्रति फर्श पर एक कम्बल या चादर के सहारे ही रात बिताती है|

छट पूजा की date और पूरी जानकारी

आपको बताऊ इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नये कपड़े पहनते हैं जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की गयी होती है व्रति को ऐसे कपड़े पहनना अनिवार्य होता है|महिलाएँ साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ करते हैं|छठ पर्व को शुरू करने के बाद सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला इसके लिए तैयार न हो जाए|घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है|

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अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये छट पूजा वाला आर्टिकल बहुत पसंद आया होगा अगर आप सभी ने मेरे इस पोस्ट को अच्छे से read किया होगा तो आपको जरुरी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message box में लिखकर पूछ सकते हैं और अगर आपके भी पास ऐसी कोई जानकारी है तो आप share कर सकते हैं|

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