जगतगुरु रामभद्राचार्य का जीवन परिचय

दोस्तों आप सभी रामानंदाचार्य समुदाय और हिन्दू सनातन धर्म से भली भांति परिचित है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको एक ऐसे संत के बारे में बात करने जा रहा हु जो विश्व विख्यात है और हर क्षेत्र में आपको ख्याति प्राप्त है और हर एक क्षेत्रो में आप पारंगत है|मै बात करने जा रहा हु जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की|जिनको गोस्वामी तुलसीदास जी का ही रूप माना जाता है|हिन्दू सनातन धर्म गुरु रामानंदाचार्य जी के स्वरुप रामभद्राचार्य जी को भारत रत्न प्राप्त हुआ है और आपके जैसा दूसरा कोई वक्ता, ज्ञानी एस समय नहीं है और मै समझता हु न ही होगा|

जगतगुरु रामभद्राचार्य का जीवन परिचय

आपको बताये रामभद्राचार्य जी रामनंद सम्प्रदाय के वर्तमान चार जगतगुरु रामानान्दचार्यो में से एक है और आप 1988 से इस पद पर प्रतिष्ठित है|रामभद्राचार्य जी एक प्रख्यात विद्वान, हिन्दू धर्मगुरु, रचनाकार, दार्शनिक, शिक्षाविद, बहुभाषाविद, प्रवचनकार है|जो की रामकथा और कृष्ण कथा के सबसे अच्छे प्रवचनकार है आपके जैसा कोई नही है और आपको संगीत का भी बहुत अधिक ज्ञान है संगीत के क्षेत्र में भी आपके जैसा कोई नही है|दोस्तों आइये हम जानते है रामभद्राचार्य जी के बारे में उनके जीवन से जुडी कुछ अहम् जानकारी और इनका जीवन परिचय|

जगतगुरु रामभद्राचार्य जी का जीवन परिचय –

पूरा नाम               – जगतगुरु रामभद्राचार्य|

पूर्वाश्रम नाम         – गिरिधर मिश्र|

जन्म                    – 14 जनवरी 1950|

जन्म स्थान            – जौनपुर, उत्तरप्रदेश|

माता पिता             – शचीदेवी, पं राजदेव मिश्र|

गुरु                       – पं ईश्वरदास महाराज|

जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी का जन्म 14 जनवरी सन 1950 को शादी खुर्द, जौनपुर, उत्तरप्रदेश में हुआ|इनके पिता पं राजदेव मिश्र और इनकी माता का नाम शचीदेवी जो एक धार्मिक महिला थी|बचपन से ही आपको धर्म की बाते सुनने को मिली और 4 वर्ष की ही अवस्था में आप कविताये करने लगे और 8 साल की उम्र से ही आप भागवत कथा और रामकथा करने लगे|दोस्तों आपको सबसे बड़ी बात बताये बचपन से ही रामभद्राचार्य ही नेत्रहीन है|3 साल की उम्र में ही आपकी आँखों को भगवान् ने ले लिया और तभी से आपके पुरे जीवन का जिम्मा आपकी बुआ ने ले लिया|3 साल की उम्र में एक बार आपकी आँखों में कोई परेशानी आ गयी थी जिससे आपकी बुआ ने आँख में कोई दवा डाल दी शायद जिसके कारण आपके आँखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गयी|इनकी आँख में रोहुआ नाम का रोग हो गया|

रामभद्राचार्य जी चित्रकूट में स्थित गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम पर स्थापित तुलसी पीठ नामक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष हैं|वे चित्रकूट स्थित जगतगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति हैं|यह विश्वविद्यालय केवल चतुर्विध विकलांग विद्यार्थियों को स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और डिग्री प्रदान करता है|26 जुलाई, 2001 को उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इसका उद्घाटन किया था|इस विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या लगभग 600 है जिसमें 80 के करीब छात्राएं भी हैं|बी.एड पाठ्यक्रम के कुछ विद्यार्थियों को छोड़कर सभी विद्यार्थी विकलांग है|फिलहाल इनमें से ढाई सौ बच्चों को छात्रावास सुविधा विश्वविद्यालय की ओर से मिली है|

दोस्तों आपको बताऊ विश्वविद्यालय में विकलांग विद्यार्थियों के लिए अधिकांश सुविधाएं नि:शुल्क या फिर नाममात्र के शुल्क पर उपलब्ध हैं|वैसे यहां उ.प्र., बिहार, म.प्र. के विद्यार्थी ही ज्यादा है, कुछ विद्यार्थी असम, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराञ्चल से भी आए हैं|जगद्गुरु के तुलसी-पीठ आश्रम में छात्राओं को छात्रावास सुविधा मिली हुई है|इसके अतिरिक्त आश्रम परिसर में ही प्रज्ञाचक्षु (नेत्रहीन), मूक-बधिर एवं अस्थि विकलांग बच्चों के लिए प्राथमिक पाठशाला से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक विद्यालय भी चलता है और अध्ययनरत सभी बच्चों को आवास, भोजन, वस्त्र इत्यादि सुविधाएं भी नि:शुल्क प्राप्त हैं|स्वामी रामभद्राचार्य कहते हैं- “विकलांग मेरे भगवान हैं|” और सचमुच उनकी अनूठी भगवद्साधना ने मानवता की सेवा का एक अभिनव अध्याय ही रच दिया है|

“मानवता ही मेरा मन्दिर मैं हूँ इसका एक पुजारी,हैं विकलांग महेश्वर मेरे मैं हूँ इनका कृपाभिखारी”|

साहित्यिक कार्य –

  • प्रस्थानत्रयी पर राघवकृपाभाष्य|
  • श्रीभार्गवराघवीयम्भृं|
  • गदूतम्, गीतरामायणम्|
  • श्रीसीतारामसुप्रभातम्|
  • श्रीसीतारामकेलिकौमुदी|
  • अष्टावक्र|

सम्मान –

  1. धर्मचक्रवर्ती|
  2. महामहोपाध्याय|
  3. श्रीचित्रकूटतुलसीपीठाधीश्वर|
  4. जगद्गुरु रामानन्दाचार्य|
  5. महाकवि|
  6. प्रस्थानत्रयीभाष्यकार|

उपलब्धि –

  • भारत रत्न |
  • पद्म बिभूषण|
  • जगतगुरु|

“मेरे गिरिधारी जी से काहे लरी,
तुम तरुणी मेरो गिरिधर बालक काहे भुजा पकरी,
सुसुकि सुसुकि मेरो गिरिधर रोवत तू मुसुकात खरी|
तू अहिरिन अतिसय झगराऊ बरबस आय खरी,
गिरिधर कर गहि कहत जसोदा आँचर ओट करी|”

दोस्तों जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी बहुत से ऐसे सामाजिक कार्य किये और कर रहे है जिसका बखान करना कठिन है|आपको बताना चाहूँगा अयोध्या मामले में रामजन्म भूमि मसले में भी आपने बहुत कार्य किये जो बखाने योग्य है|इस तरह आज दोस्तों आपने जाना जगतगुरु के बारे में|मै समझता हु स्वामी जी के बारे में जितना भी बताएँगे कम ही रहेगा और कोई भी आपका पूरा वर्णन कर ही नही सकता वो तो आप ही बता सकते है|अब मै उम्मीद के साथ कह सकता हु की आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा अगर आपने अच्छे से मेरे इस पोस्ट को पढ़े होंगे तो जरुर आपको अछि जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो तो message के द्वारा पूछ सकते है|

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