देवानंद का जीवन परिचय

दोस्तों आज हम देख रहे है फ़िल्मी जगत कहाँ से कहाँ पहुँच रहा है|जैसे जैसे टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है वैसे ही हम सभी जगह पर कुछ अलग कर रहे है|फ़िल्मी जगत की अगर बात करे तो पहले की अपेक्षा अब बहुत अधिक सब कुछ बदल गया है|तो किरदारों का बदलना भी वाजिब है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको एक ऐसे महान और मुहब्बत के बादशाह की बात करने जा रहे है जिनकी पूरी दुनिया दीवानी थी और आज भी है|जिसे देख कर लड़कियां अपना सब कुछ न्योछावर कर देती थी और अपने जान से अधिक देव आनंद साहब से प्यार करती थी|आप सभी आज देवानंद जी से जुडी कुछ अहम् और रोचक जानकारी प्राप्त करेगे और साथ ही इनका जीवन परिचय भी विस्तार से जानेगे तो आइये जानते है|

देवानंद का जीवन परिचय

देवानंद का जीवन परिचय –

पूरा नाम                   – धरमदेव पिशोरीमल आनंद ‘देव आनंद|

जन्म                          – 26 सितम्बर 1923|

जन्म स्थान                 – गुरुदास पुर, पकिस्तान|

मृत्यु                            – 3 दिसम्बर 2011|

देव आनन्द साहब का जन्म 26 सितम्बर 1923 को अविभाजित पंजाब के गुरदासपुर जिले (अब पाकिस्तान में ) के एक मध्मयवर्गीय परिवार में हुआ था|तब उनका नाम धर्मदेव (देवदत्त) पिशौरीमल आनन्द था|आपको बताये देव साहब का बचपन परेशानियों से घिरा रहा|बचपन से ही उनका झुकाव अपने पिता के पेशे वकालत की ओर न होकर अभिनय की ओर था|एक वकील और आज़ादी के लिए लड़ने वाले पिशौरीमल के घर पैदा होने वाले देव ने रद्दी की दुकान से जब बाबूराव पटेल द्वारा सम्पादित ‘फ़िल्म इंडिया’ के पुराने अंक पढ़े तो उन की आंखों ने फ़िल्मों में काम करने का सपना देख डाला और वह माया नगरी मुंबई के सफर पर निकल पड़े|

आपको बताये देव साहब ने मिलट्री सेंसर ऑफिस में 160 रुपये प्रति माह के वेतन पर काम की शुरुआत की|शीघ्र ही उन्हें प्रभात टाकीज़ एक फिल्म ‘हम एक है’ काम करने का मौका मिला और पूना में शूटिंग के वक़्त उनकी दोस्ती अपने ज़माने के सुपर स्टार गुरु दत्त से हो गयी|कुछ समय बाद अशोक कुमार के द्वारा उन्हें एक फिल्म में बड़ा ब्रेक मिला|उन्हें बॉम्बे टाकीज़ प्रोडक्शन की फिल्म ज़िद्दी में मुख्य भूमिका प्राप्त हुई और इस फिल्म में उनकी सहकारा थीं कामिनी कौशल, ये फिल्म 1948 में रिलीज़ हुई और सफल भी हुई|1949 में देव आनंद ने अपनी एक फिल्म कम्पनी बनाई, जिसका नाम नवकेतन रखा गया, इस तरह अब वो फिल्म निर्माता बन गए|देव आनंद साहब ने अपने मित्र गुरुदत्त का डाइरेक्टर के रूप में चयन किया और एक फिल्म का निर्माण किया, जिसका नाम था बाजी, ये फिल्म 1949 में प्रदर्शित हुई और काफी सफ़ल हुई|यहीं से देव साहब का करियर अच्छे से सुरु हुआ|

शिक्षा –

दोस्तों आपको बताये देव साब ने अपनी स्नातक की शिक्षा अंग्रेजी साहित्य से लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से पूर्ण की|इसके बाद आपको बताये देव साब की शिक्षा पर पूर्ण विराम लग गया क्युकी उनके पिता के पास इतने पैसे नही थे की उनकी आगे की उच्च शिक्षा दिला सकते|इसके बाद वो सब छोड़ कर माया नगरी मुंबई आये और वही से उन्होंने अपने करियर की सुरुआत की|

फ़िल्मी सफ़र – 

आप सभी जानते है देव आनंद जी फ़िल्मी जगत के सबसे मशहूर सदाबहार अभिनेताओ में से एक थे|जिनकी पूरी दुनिया दीवानी थी|एक बात आपको बताये जब भी वो काले कपडे में निकलते थे तो लड़कियां उन्हें देखकर आत्म हत्या [पर उतारू हो जाती थी इसलिए उनके इस ड्रेस पर बैन हो गया था|ऐसे थे देव साब|देव आनंद और उनके छोटे भाई विजय आनंद को फ़िल्मों में लाने का श्रेय उनके बड़े भाई चेतन आनंद को जाता है|देव ने ये सपने में भी न सोचा होगा कि कामयाबी इतनी जल्दी उनके क़दम चूमेगी मगर ये तीस रुपए रंग लाए और जाएँ तो जाएँ कहाँ का राग अलापने वाले देव आनंद को माया नगरी मुम्बई में आशियाना मिल गया|

दोस्तों आपको बताये गायक बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे देवानंद अभिनेता बन गए|देव साब के भाई चेतन आनंद और विजय आनंद भी भारतीय सिनेमा में सफल निर्देशक रहे हैं|उनकी बहन शील कांता कपूर प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक शेखर कपूर की मां है|देव साब की पहली फिल्म “हम एक है“|फ़िल्मी दुनिया में क़दम रखने के बाद उनका नाम सिमट कर हो गया देवानंद|देव आनंद को अभिनेता के रूप में पहला ब्रेक 1946 में प्रभात स्टूडियो की फ़िल्म ‘हम एक हैं’ से मिला|लेकिन इस फ़िल्म के असफल होने से वह दर्शकों के बीच अपनी पहचान नहीं बना सके|इस फ़िल्म के निर्माण के दौरान प्रभात स्टूडियो में उनकी मुलाकात बाद के मशहूर फ़िल्म निर्माता-निर्देशक गुरुदत्त से हुई जो उन दिनों फ़िल्मी दुनिया में कोरियोग्राफर के रूप में स्थान बनाने के लिए संघर्षरत थे|वहाँ दोनों की दोस्ती हुई और एक साथ सपने देखते इन दोनों दोस्तों ने आपस में एक वादा किया कि अगर गुरुदत्त फ़िल्म निर्देशक बनेंगे तो वे देव को अभिनेता के रूप में लेंगे और अगर देव निर्माता बनेंगे तो गुरुदत्त को निर्देशक के रूप में लेंगे|

अवार्ड – 

आपको बताये देव आनंद, दिलीप कुमार और राजकपूर 1950 दशक के बड़े स्टार रहे हैं|देव आनंद को अपने अभिनय के लिए दो बार फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है|देव आनंद को सबसे पहला फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार वर्ष 1958 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘काला पानी‘ के लिए दिया गया|इसके बाद वर्ष 1965 में भी देव आनंद फ़िल्म ‘गाइड’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए|सन् 1991 में देव आनंद को फ़िल्म फेयर पुरस्कार मिला| वर्ष 2001 में देव आनंद को भारत सरकार की ओर से कला क्षेत्र (फ़िल्म जगत में योगदान) में पद्म विभूषण सम्मान प्राप्त हुआ|वर्ष 2002 में उनके द्वारा हिंदी सिनेमा में महत्त्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया|

मृत्यु –

देव आनंद साब भारतीय सिनेमा जगत के सदाबहार अभिनेता थे जिनका निधन लन्दन में दिल का दौरा पड़ने से 3 दिसम्बर 2011 को 88 वर्ष की उम्र में हो गया|आज भी लोग आपसे उतना ही प्यार करते है|

दोस्तों अब मै समझ सकता हु आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा और अगर आप ने अच्छे से मेरे इस पोस्ट को पढ़े होंगे तो जरुर आपको देव साब से जुडी अहम् जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको देव साब से जुडी कोई जानकारी लेनी हो तो आप निचे message के द्वारा पूछ सकते है|

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