नर्क चतुर्दशी पूजा विधि और कथा

दोस्तों, नर्क चतुर्दशी जिसे रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है हमारे देश में ये त्यौहार दीवाली से पहले होता है इस दिन सभी लोग पूजा करते हैं और सूख समृधि की कामना करते हैं और इसी दिन छोटी दीवाली भी होती है|नर्क चतुर्दशी कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को होता है|यह त्यौहार नरक चौदस या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है| ऐसी मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है|विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं|वैसे आपको बताये नर्क चतुर्दशी 2017 में यानि इस बार 18 अक्टूबर दिन वुधवार को मनाया जायेगा|

नर्क चतुर्दशी पूजन विधि

आपको बताये ऐसी मान्यता है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से अकालमृत्यु और काल का भय नही रहता है और जीवन सुखमय हो जाता है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको बताने जा रहा हूँ कि कैसे आप इस दिन पूजा करे यानि मै आपको पूजन विधि बताने जा रहा हूँ साथ ही आपको कुछ कथाएं भी बताने जा रहा हूँ उम्मीद है आपको जरुर पसंद आएगा|आइये जानते हैं|

नरक चतुर्दशी पूजन विधि –

नर्क चतुर्दशी पूजन विधि

  • दोस्तों इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल या उबटन लगाकर मालिश करने के बाद स्नान करना चाहिए|ऐसा माना जाता हैं कि जो व्यक्ति नरक चतुर्दशी के दिन सूर्य के उदय होने के बाद नहाता हैं|उसके द्वारा पूरे वर्ष भर में किये गये शुभ कार्यों के फल की प्राप्ति नहीं होती|मै समझता हूँ आप सभी ऐसा जरुर करेंगे|
  • सूर्य उदय से पहले स्नान करने के बाद दक्षिण मुख करके हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करें|ऐसा करने से व्यक्ति के द्वारा किये गये वर्ष भर के पापों का नाश होता हैं|
  • नरक चतुर्दशी की शाम को सभी देवताओं की पूजा करने के बाद तेल के दीपक जलाकर घर के दरवाजे की चोखट के दोनों ओर, सड़क पर तथा अपने कार्यस्थल के प्रवेश द्वारा पर रख दें|ऐसा माना जाता हैं कि इस दिन दीपक जलाने से पूरे वर्ष भर लक्ष्मी माता का घर में स्थाई निवास होता हैं|
  • इस दिन हनुमान जी की पूजा करना बहुत फलदायी होता है और सुन्दरकाण्ड का पाठ जरुर करना चाहिए|

नर्क चतुर्दशी की कथा –

नर्क चतुर्दशी पूजन विधि

एक कथा के अनुसार रन्तिदेव नामक एक राजा हुए थे|वह बहुत ही पुण्यात्मा और धर्मात्मा पुरुष थे|सदैव धर्म, कर्म के कार्यों में लगे रहते थे|जब उनका अंतिम समय आया तो यमराज के दूत उन्हें लेने के लिए आये|वे दूत राजा को नर्क में ले जाने के लिए आगे बढ़े|यमदूतों को देख कर राजा आश्चर्य चकित हो गये और उन्होंने पूछा मैंने तो कभी कोई अधर्म या पाप नहीं किया है तो फिर आप लोग मुझे नर्क में क्यों भेज रहे हैं|कृपा कर मुझे मेरा अपराध बताइये, कि किस कारण मुझे नरक का भागी होना पड़ रहा है|राजा की करुणा भरी वाणी सुनकर यमदूतों ने कहा हे राजन एक बार तुम्हारे द्वार से एक ब्राम्हण भूखा ही लौट गया था, जिस कारण तुम्हें नरक जाना पड़ रहा है|

दोस्तों राजा ने यमदूतों से विनती करते हुए कहा कि वह उसे एक वर्ष का और समय देने की कृपा करें|राजा का कथन सुनकर यमदूत विचार करने लगे और राजा को एक वर्ष की आयु प्रदान कर वे चले गये|यमदूतों के जाने के बाद राजा इस समस्या के निदान के लिए ऋषियों के पास गया और उन्हें समस्त वृत्तांत बताया|ऋषि राजा से कहते हैं कि यदि राजन कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करे और ब्राह्मणों को भोजन कराये और उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करे तो वह पाप से मुक्त हो सकता है|ऋषियों के कथन के अनुसार राजा कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्दशी का व्रत करता है|इस प्रकार वह पाप से मुक्त होकर भगवान विष्णु के वैकुण्ठ धाम को पाता है|तभी से ये दिन बहुत अच्छा माना जाने लगा और सभी इस दिन पूजा करते हैं|

नर्क चतुर्दशी पूजन विधि

दोस्तों अब मै समझ सकता हूँ आप सभी ने मेरा ये पोस्ट पढ़ा होगा और आपको अच्छा भी लगा होगा|अब मै उम्मीद के साथ कह सकता हूँ आपको मेरा पोस्ट अच्छा लगा और समझ में आया|अगर आपने read किया होगा तो आपको जरुरी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना या बताना हो तो आप नीचे message box में comment कर बता सकते हैं|

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