नर्क चतुर्दशी 2017 की Date और पूरी जानकारी

दोस्तों, हमारे भारत देश में बहुत से त्यौहार मनाये जाते हैं और ऐसे में अगर अक्टूबर की बात की जाए तो अक्टूबर महीने में बहुत से पर्व होते हैं|आप सभी जानते हैं दीवाली के मौके पर बहुत से त्यौहार उससे पहले और बाद में होते हैं जैसे छट पूजा मैंने इससे पहले वाले आर्टिकल में पोस्ट किया है दीवाली के बाद मनाया जाता है और अगर नरक चतुर्दशी की बात करें तो ये दीवाली के पहले मनाया जाता है|इस बार यानि 2017 में नर्क चतुर्दशी का त्यौहार हम सभी 18 अक्टूबर को मनाएंगे|जो कि वुधवार को मनाया जायेगा|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको कुछ नर्क चतुर्दशी के जुडी जानकारी दे रहा हूँ साथ ही आपको इसके बारे में अच्छे से बताऊंगा और इससे जुडी कुछ कथाएं हैं आप सभी के सामने पेश कर रहा हूँ|उम्मीद है आपको जरुर पसंद आएगा|

नरक चतुर्दशी की जानकारी

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आप सभी जानते हैं नरक चतुर्दशी कार्तिक महीने में चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है और नरक चतुर्दशी को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन आलस्य और बुराई को हटाकर जिंदगी में सच्चाई की रोशनी का आगमन होता है|इसीलिए इस त्यौहार को मनाया जाता है|बहुत से लोग सर्च करते हैं नरक चतुर्दशी कब है इसकी date, नर्क चतुर्दशी की कथा कौन सी है इसके पीछे का राज क्या है और साथ ही सभी जानना चाहते हैं कि इस दिन पूजा किसकी और कैसे की जाती है तो आपको बताना चाहूँगा आज मै आपको ये सभी बातें इस पोस्ट में बताने वाले हैं अगर आप अच्छे से मेरे इस पोस्ट को read करेंगे तो उम्मीद है आपको सभी जानकारी मिल जाएगी|आइये जानते हैं|

नर्क चतुर्दशी के बारे में –

नर्क चतुर्दशी की जानकारी

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आपको बताऊ नरक चतुर्दशी कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को माना जाता है|नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं|इसके अतिरिक्त इस चतुर्दशी को नरक चौदस, रूप चौदस, रूप चतुर्दशी, नर्क चतुर्दशी या नरका पूजा के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है|दीवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी के दिन संध्या के पश्चात् दीपक प्रज्जवलित किए जाते हैं|इस चतुर्दशी का पूजन कर अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज जी की पूजा व उपासना की जाती है|

आपको बताये नरक चतुर्दशी की सबसे महत्वपूर्ण रस्म है, लोग सुबह सूर्योदय से पहले या चन्द्रोदय के दौरान उठ जाते हैं|अपने शरीर पर उबटन (तिल का तेल, जड़ी बूटी, फूल के साथ ही कुछ महत्वपूर्ण तत्व से बना) लगाते है और पवित्र स्नान या अभ्ज्ञान स्नान लेते है|यह माना जाता है कि जो इस विशेष अवसर पर ऐसा नही करता है वह नरक में जाता है|यह दिन काली चौदस, छोटी दिवाली, रुप चतुर्दशी और रुप चौदस के नाम से भी जाना जाता है|इस तरह सभी इस त्यौहार को मनाते हैं|

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नरक चतुर्दशी की कथा –

नर्क चतुर्दशी की जानकारी

दोस्तों, अतीत के प्राचीन इतिहास के अनुसार रन्ती देव नाम का एक राजा था|वह बहुत आध्यात्मिक और चालाक आदमी था|वह हमेशा मानव जाति की सेवा और धार्मिक कार्यों और में खुद को लगाये रखता था|एक दिन मृत्यु के भगवान, यम, राजा की आत्मा को लेने के लिए उसके पास आये|राजा ने यम से पूछा कि मैंने अपने पूरे जीवन भर कोई बुरा काम और पाप कभी नहीं किया|तो आप मुझे नरक में ले जाने क्यों आये है| यम ने उत्तर दिया बहुत समय पहले तुमने अपने दरवाजे से भूखे पुरोहित को लौटा दिया था|यही कारण है कि मैं यहाँ तुम्हें नरक में ले जाने आया हूँ|

राजा ने यम से एक साल का और जीवन देने की प्रार्थना की|यम ने एक वर्ष का अधिक जीवन उसे दे दिया, और उसके बाद राजा संतों के साथ से मिले और उन्हें अपनी कहानी बतायी|उन्होंने उसे नरक चतुर्दशी पर उपवास रखने और पुजारियों को भोजन प्रदान करने के साथ ही अपनी अतीत की गलती के लिए माफी माँगने के लिए सुझाव दिया|इस तरह आपको अपने अतीत पाप से राहत मिल सकती है|उस दिन से नरक चतुर्दशी अपने सभी पापों से मुक्त होने के साथ ही अपने आपको नरक से दूर रखने के लिये मनाया जाता है|

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नर्क चतुर्दशी की जानकारी

दोस्तों अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा अगर आप मेरे इस पोस्ट को अच्छे से read किये होंगे तो आपको बहुत सी अच्छी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो या बताना हो तो आप मुझे नीचे message box में type कर comment कर सकते हैं|अब मै उम्मीद के साथ कह सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत पसंद आया होगा|अगर आपके पास ऐसी कोई जानकारी हो तो हमे जरुर बताएं|

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