प्रार्थना क्या है और क्यों की जाती है ?

दोस्तों, हम सभी भगवान् की पूजा अर्चना करते हैं और हर धर्म के लोग प्रार्थना करते हैं|लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम ये क्यों करते हैं या इससे क्या फायदा है|भगवान् और प्रार्थना से क्या सम्बन्ध है यानि क्या connection है|आज मै आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने जा रहा हूँ कि प्रार्थना क्या है और क्यों किया जाता है और इससे क्या फायदे है|लेकिन एक बात तो बिलकुल सही है कि भगवान् हमारी प्रार्थना को जरुर सुनते हैं और और उसका उत्तर भी देते हैं|भगवान् के लिए हमारी प्रार्थना के परिणाम के बारे में बहुत तरह की सोच यानि भावनाएं और निष्कर्ष हो सकते हैं|

प्रार्थना क्या है

प्रार्थना क्या है ?

दोस्तों, प्रार्थना का अर्थ है धन्यवाद देना|यानि भगवान् ही हर जगह हैं और उन्ही का सब कुछ है तो भगवान् ने आपको जो कुछ भी दिया है या आपके पास जो कुछ भी इस समय है उसके लिए आप सभी को भगवान् को धन्यवाद देना चाहिए इसी को प्रार्थना कहते हैं यही प्रार्थना है|लेकिन मंदिर में जाकर हाथ जोड़कर कुछ कहना इसे याचना कहा जाता है|इसको हम प्रार्थना नही कहेंगे|प्रार्थना करते समय हम उस ईश्वर का ध्यान करते हैं और उसका धन्यवाद देते हैं जिसने आप सभी को ये सुन्दर जीवन दिया है|

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प्रार्थना क्यों की जाती है ?

प्रार्थना क्या है आप सभी जान गए लेकिन प्रार्थना क्यों की जाती है अभी आप सभी के दिमाग में ये बात आ रही है तो मै आपको बताऊ हमारे जीवन के उद्देश्यों में सांसारिक उद्देश्य जैसे धन, परिवार, यश, कीर्ति और स्वास्थ्य प्राप्त करने से लेकर हमे दुःख पहुचाने वाले की बद्दुआ हो सकती है|इतना ही नही इसके अलावा हम कुछ इच्छाओं की पूर्ति के लिए दुआ कर सकते हैं जो इर्ष्या से या प्रतिद्वंदिता के कारण हमारे मन में उत्पन्न होती है|

दोस्तों हमारे पास जो कुछ भी धन संपत्ति है उसे खोने का डर भी हो सकता है इसलिए हम इसके विकास के लिए प्रार्थना करते हैं और जीवन सुखमय रहने के लिए भी|मेरे कहने का मतलब जो कुछ हमारे पास है वो बना रहे इसीलिए हम सभी प्रार्थना करते हैं|वैसे आपको बताएं पसंदी, नापसन्दी, महत्वाकान्छायें और इच्छाएं इसे कोई अंतर नही है क्योंकि उनके मूल में लगाव और घृणा छिपी हुई है|

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वैसे दोस्तों हमने अपने जीवन में कुछ चीजों की इच्छा नहीं की फिर भी मेरी भलाई के लिए आवश्यक इच्छाएं पूरी हुयी|तो आप बताइए इसका मतलब ये है की हमे किसी भी चीज़ के लिए प्रार्थना नही करनी चाहिए और हमारे प्रयासों से जो कुछ भी मिलता है उसे स्वीकार करना चाहिए|इतना ही नही आपको बताये अगर हम ज्योतिष को मानते हैं तो पता लगता है कि जन्म से पहले जीवन के कर्म फलों के आधार पर इस जीवन की राह पहले ही निश्चित हो चुकी है|लेकिन कर्म करने की स्वतंत्रता के कारण दण्डित व्यक्ति का सचरित्र होने तथा धर्मी का पतन संभव है|

आपको बताये अधिकतर ये माना जाता है कि मनुष्य के अलावा अन्य किसी प्रजाति को ऐसी स्वतंत्रता नही है|यह तो मनुष्य ही है जो कभी अपनी स्थिति से संतुष्ट नही होता है और एक ज्योतिषी से अपनी पीड़ा कम करने के लिए या वांछित परिणाम प्राप्त करने हेतु सलाह लेता है|दोस्तों अगर कोई बर्बादी की दशा में भगवान् के चरणों का आश्रय लेता है या उसकी दया पर सब कुछ छोड़ देता है तो संतों ने स्थिति सुधरने का भरोषा दिलाया है|इस भलाई को भौतिक वस्तुओ और महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के रूप में नही मापा जाना चाहिए|बल्कि जो मन की शांति या आध्यात्मिकता में जो मिलता है उससे इसकी माप होती है|

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अब बात की जाये कि भगवान् से प्रार्थना का सही स्थान कहाँ होता है|अब आपको बताये संतो के अनुसार प्रार्थना करने का कोई विशिष्ट स्थान नही है या इसे अनुष्ठान पूर्वक किया जाये इसलिए आप कहीं भी प्रेम भाव से भगवान् की प्रार्थना कर सकते हैं|

दोस्तों अब मै समझ सकता हूँ कि आप सभी ने अच्छे से मेरे इस पोस्ट को पढ़ा होगा और समझ में भी आया होगा|कहते हैं तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा इसी श्रद्धा भाव से हम सभी को भगवान् की स्तुति करनी चाहिए|अगर आप को कुछ पूछना हो तो निचे message के द्वारा पूछ सकते हैं|

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