भीष्म साहनी का जीवन परिचय

दोस्तों, भीष्म साहनी जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी और बहुत ही ईमानदार व्यक्ति रहे हैं|जिनका सारा जीवन देश सेवा और समाज की देखभाल ही रहा है साथ ही आप आदमी की आवाज उठाने और हिंदी के महान लेखक यानि कवि रहे हैं|जो कि आम आदमी की समस्याओं को सुलझाने वाले थे|मुंशी प्रेमचन्द्र के जैसे ये भी अपना सारा जीवन लोगों की भलाई में लगा दिया|आपको बताये प्रगतिवादी आन्दोलन 1930 के बाद उभर रहे यथार्थवादी परिणामों व परिस्थितियों को विकसित करने वाला आन्दोलन था|इस आन्दोलन ने सामाजिकता से परिपुष्ट यथार्थवादी कथा साहित्य की नींव रखी|प्रगतिवादी साहित्य को प्रारम्भिक दौर में रचना की दृष्टि से नेतृत्व व निर्देशन प्रेमचन्द, पंत, निराला और उग्र से मिला परन्तु उपन्यास के माध्यम से मार्क्सवादी विचारों याको जनता तक पहुँचाने का प्रथम प्रयास राहुल सांकृत्यायन ने ‘भागो नही दुनिया को बदलो’ के माध्यम से की|

भीष्म साहनी का जीवन परिचय

भीष्म साहनी को हिन्दी साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा का अग्रणी लेखक माना जाता है|वे मानवीय मूल्यों के लिए हिमायती रहे और उन्होंने विचारधारा को अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया|वामपंथी विचारधारा के साथ जुड़े होने के साथ-साथ वे मानवीय मूल्यों को कभी आंखो से ओझल नहीं करते थे|आपाधापी और उठापटक के युग में भीष्म साहनी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग था|उन्हें उनके लेखन के लिए तो स्मरण किया ही जाएगा लेकिन अपनी सहृदयता के लिए वे चिरस्मरणीय रहेंगे|अब आइये हम सभी भीष्म साहनी के जीवन पर प्रकाश डालते हैं|

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भीष्म साहनी का जीवन परिचय –

भीष्म साहनी का जीवन परिचय

पूरा नाम – भीष्म साहनी|

जन्म – 8 अगस्त 1915|

जन्म स्थान – रावलपिंडी, पकिस्तान|

माता – श्रीमती लक्ष्मी देवी|

पिता – श्री हरवंश लाल साहनी|

दोस्तों, लेखक भीष्म साहनी जी का जन्म 8 अगस्त, सन् 1915 में अविभाजित भारत के रावलपिण्डी में हुआ था|उनके पिता का नाम हरबंस लाल साहनी तथा माता लक्ष्मी देवी थीं|उनके पिता अपने समय के प्रसिद्ध समाजसेवी थे|आपको बताये हिंदी फ़िल्मों के ख्यातिप्राप्त अभिनेता बलराज साहनी, भीष्म साहनी के बड़े भाई थे|पिता के समाजसेवी व्यक्तित्व का इन पर काफी प्रभाव पड़ा|भीष्म साहनी का विवाह शीला जी के साथ हुआ था|देश के विभाजन से पहले भीष्म साहनी ने व्यापार भी किया और इसके साथ ही वे अध्यापन का भी काम करते रहे|तदनन्तर उन्होंने पत्रकारिता एवं ‘इप्टा’ नामक मण्डली में अभिनय का कार्य किया|साहनी जी फ़िल्म जगत् में भाग्य आजमाने के लिए मुंबई आ गये, जहाँ काम न मिलने के कारण उनको बेकारी का जीवन व्यतीत करना पड़ा|

आपको बताऊ उनकी पहली कहानी ‘अबला’ इण्टर कालेज की पत्रिका ‘रावी’ में तथा दूसरी कहानी ‘नीली ऑंखे’ अमृतराय के सम्पादकत्व में ‘हंस’ में छपी|साहनी जी के ‘झरोखे’, ‘कड़ियाँ’, ‘तमस’, ‘बसन्ती’, ‘मय्यादास की माड़ी’, ‘कुंतो’, ‘नीलू नीलिमा नीलोफर’ नामक उपन्यासो के अतिरिक्त भाग्यरेखा, पटरियाँ, पहला पाठ, भटकती राख, वाड|इतना ही नही चू, शोभायात्रा, निशाचर, पाली, प्रतिनिधि कहानियाँ व मेरी प्रिय कहानियाँ नामक दस कहानी संग्रहों का सृजन किया|नाटको के क्षेत्र में भी उन्होने हानूश, कबिरा खड़ा बाजार में, माधवी मुआवजे जैसे प्रसिद्धि प्राप्त नाटक लिखे|जीवनी साहित्य के अन्तर्गत उन्होने मेरे भाई बलराज, अपनी बात, मेंरे साक्षात्कार तथा बाल साहित्य के अन्तर्गत ‘वापसी’ ‘गुलेल का खेल’ का सृजन कर साहित्य की हर विधा पर अपनी कलम अजमायी|इस तरह बहुत सी रचनाएँ उनकी हैं जो बहुत ही अलौकिक हैं|आपको बताये अपनी मृत्यु के कुछ दिन पहले उन्होने ‘आज के अतीत’ नामक आत्मकथा का प्रकाशन करवाया|यही उनकी अंतिम उपलब्धि कहा जा सकता है|

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रचनाएँ –

उपन्यास – झरोखे, तमस, बसन्ती, मायादास की माडी, कुन्तो, नीलू निलिमा निलोफर|

कहानी संग्रह – मेरी प्रिय कहानियां, भाग्यरेखा, वांगचू, निशाचर|

नाटक – हनूश, माधवी, कबीरा खड़ा बजार में, मुआवज़े|

आत्मकथा – बलराज माय ब्रदर|

बालकथा – गुलेल का खेल|

दोस्तों स्वतंत्र व्यक्तित्व वाले भीष्म साहनी गहन मानवीय संवेदना के सशक्त हस्ताक्षर थे|उन्होंने भारत  के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक यथार्थ का स्पष्ट चित्र अपने उपन्यासों में प्रस्तुत किया है|उनकी यथार्थवादी दृष्टि उनके प्रगतिशील व मार्क्सवादी विचारों का प्रतिफल थी|भीष्म जी की सबसे बड़ी विशेषता थी कि उन्होंने जिस जीवन को जिया, जिन संघर्षों को झेला, उसी का यथावत् चित्र अपनी रचनाओं में अंकित किया|इसी कारण उनके लिए रचना कर्म और जीवन धर्म में अभेद था|वह लेखन की सच्चाई को अपनी सच्चाई मानते थेबेहद सादगी पंसद रचनाकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर साहनी को पद्म भूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार से सम्मानित किया गया|समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज उठाने वाले इस लेखक का 11 जुलाई सन् 2003 को इनका शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया|

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इस तरह आज आप सभी ने महान व्यक्तित्व के जीवन पर प्रकाश डाला और अच्छे से आपको जानकारी दी|उम्मीद है सभी को बेहद पसंद आया होगा अगर आप सभी ने इस पोस्ट को अच्छे से read किया होगा तो आपको जरुरी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको इस post से related कुछ पूछना हो या आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी हो तो आप हमसे साझा कर सकते हैं|साथ ही आप message box में comment कर बता सकते हैं|

 

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