महर्षि वाल्मीकि Birthday की जानकारी और HD Wallpaper

दोस्तों, हमारा देश धर्मप्रधान और गुरुप्रधान देश रहा है|भारतदेश ऋषियों और मुनियों की भूमि रही है|ऐसे में इस धरती पर अनेक महापुरुष हुए हैं और बहुत से धर्म गुरु हुए हैं|ऐसे में एक बहुत प्रख्यात और सुविख्यात कवि महर्षि वाल्मीकि का नाम आता है|हम सभी उनका जन्म दिवस हर वर्ष मनाते हैं इस बार यानि 2017 में हम सभी उनका जन्मदिन 5 अक्टूबर दिन गुरुवार को मनाएंगे|शायद कोई हो जिसे महर्षि वाल्मीकि के बारे में जानकारी न हो|आपको बताये सनातन धर्म सबसे बड़ा धर्म है और हिन्दू धर्म सबसे उच्च माना जाता है|महर्षि वाल्मीकि संस्कृत भाषा के आदि कवि और हिन्दुओं आदि काव्य ‘रामायण’ के रचयिता के रूप में प्रसिद्ध है|आपको बताये महर्षि कश्यपऔर अदिति नवम पुत्र वरुण से इनका जन्म हुआ|इनकी माता चर्षणी और भाई भृगु थे|वरुण का एक नाम प्रचेत भी है, इसलिये इन्हें प्राचेतस् नाम से उल्लेखित किया जाता है|

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आपको बताये महर्षि वाल्मीकि जी एक ऐसे व्यक्तित्व के थे जिन्हें लोग पसंद ही नही करते थे|लेकिन कर्म आदमी को प्रधान बना देता है|आपने शायद इनके जीवन की कहानी पढ़ी हो|ये एक डाकू थे|अगर नही सुनी है तो आज मै आपको बताने जा रहा हूँ|अगर आप मेरे इस पोस्ट को अच्छे से read करेंगे तो उम्मीद है आपको बहुत मजा आएगा और समझ में भी आएगा|तो चलिए अब हम जानते हैं महर्षि वाल्मीकि जी से जुडी कुछ अहम् बातें और उनके जन्म से जुडी कुछ रोचक जानकारी आइये जानते हैं|

महर्षि वाल्मीकि का जीवन परिचय –

पूरा नाम –            महर्षि वाल्मीकि|

वास्तविक नाम –    रत्नाकर|

पिता –                 प्रचेता|

जन्म दिन –         अश्विन पूर्णिमा|

पेशा –                डाकू, महाकवि|

रचना –              रामायण|

दोस्तों आप सभी जानते हैं और शदियों से पढ़ते आ रहे हैं महर्षि वाल्मीकि का जन्म नागा प्रजाति में हुआ था|महर्षि बनने के पहले वाल्मीकि रत्नाकर के नाम से जाने जाते थे|वे परिवार के पालन-पोषण हेतु दस्युकर्म करते थे|एक बार उन्हें निर्जन वन में नारद मुनि मिले|जब रत्नाकर ने उन्हें लूटना चाहा, तो उन्होंने रत्नाकर से पूछा कि यह कार्य किसलिए करते हो, रत्नाकर ने जवाब दिया परिवार को पालने के लिये|नारद ने प्रश्न किया कि क्या इस कार्य के फलस्वरुप जो पाप तुम्हें होगा उसका दण्ड भुगतने में तुम्हारे परिवार वाले तुम्हारा साथ देंगे|रत्नाकर ने जवाब दिया पता नहीं, नारदमुनि ने कहा कि जाओ उनसे पूछ आओ|तब रत्नाकर ने नारद ऋषि को पेड़ से बाँध दिया तथा घर जाकर पत्नी तथा अन्य परिवार वालों से पूछा कि क्या दस्युकर्म के फलस्वरुप होने वाले पाप के दण्ड में तुम मेरा साथ दोगे तो सबने मना कर दिया|

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आपको बताये तब रत्नाकर नारदमुनि के पास लौटे तथा उन्हें यह बात बतायी|इस पर नारदमुनि ने कहा कि हे रत्नाकर यदि तुम्हारे घरवाले इसके पाप में तुम्हारे भागीदार नहीं बनना चाहते तो फिर क्यों उनके लिये यह पाप करते हो|यह सुनकर रत्नाकर को दस्युकर्म से उन्हें विरक्ति हो गई तथा उन्होंने नारदमुनि से उद्धार का उपाय पूछा|नारदमुनि ने उन्हें राम-राम जपने का निर्देश दिया|सभी कहते हैं मरा मरा जपने वाला क्या से क्या हो गया|

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दोस्तों भगवान्नाम का निरन्तर जप करते-करते वाल्मीकि अब ऋषि हो गये|उनके पहले की क्रूरता अब प्राणिमात्र के प्रति दया में बदल गयी|एक दिन इनके सामने एक व्याध ने क्रौंच पक्षी के एक जोड़े में से एक को मार दिया, तब दयालु ऋषि के मुख से व्याध को शाप देते हुए एक श्लोक निकला|वह संस्कृत भाषा में लौकिक छन्दों में प्रथम छंद का श्लोक था|उसी छन्द के कारण वाल्मीकि आदिकवि हुए|इन्होंने ही रामायण रूपी आदिकाव्य की रचना की|वनवास के समय भगवान श्रीराम ने स्वयं इन्हें दर्शन देकर कृतार्थ किया। मातासीता ने अपने वनवास का अन्तिम काल इनके आश्रम पर व्यतीत किया|वहीं पर लवकुश का जन्म हुआ|वाल्मीकि जी ने उन्हें रामायण का गान सिखाया|इस प्रकार नाम-जप और सत्संग के प्रभाव से वाल्मीकि डाकू से ब्रम्हार्शी हो गये|

महर्षि वाल्मीकि जी की कहानी –

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दोस्तों जिस वाल्मीकि के डाकू का जीवन बिताने का उल्लेख मिलता है, उसे रामायण के रचयिता से भिन्न माना जाता है| पौराणिक विवरण के अनुसार यह रत्नाकर नाम का दस्यु था और यात्रियों को मारकर उनके धन से अपना परिवार पालता था|एक दिन नारदजी भी इनके चक्कर में पड़ गए|जब रत्नाकर ने उन्हें भी मारना चाहा तो नारद ने पूछा-जिस परिवार के लिए तुम इतने अपराध करते हो, क्या वह तुम्हारे पापों का भागीदार बनने को तैयार है ? रत्नाकर नारद को पेड़ से बांधकर इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए घर गया|वह यह जानकर स्तब्ध रह गया कि परिवार का कोई भी व्यक्ति उसके पाप का भागीदार बनने को तैयार नहीं है|लौटकर उसने नारद के चरण पकड़ लिए और डाकू का जीवन छोड़कर तपस्या करने लगा|इसी में उसके शरीर को दीमकों ने अपना घर बनाकर ढक लिया, जिसके कारण यह भी वाल्मीकि के नाम से प्रसिद्ध हुआ|जब तक सृष्टि रहेगी तब तक रामायण और वाल्मीकिजी का नाम अमर है|

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दोस्तों, अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत बेहद अच्छा लगा होगा|अगर आप मेरे इस पोस्ट को अच्छे से read करेंगे तो आपको बहुत सी छोटी छोटी जानकारी मिल जाएगी|आपको बताना चाहूँगा सनातन धर्म और हिन्दू धर्म सबसे बड़ा धर्म है और रामायण महाकाव्य और रचना है जो सभी के लिए बहुत सुखदायी और पढने योग्य है|अतः आप सभी से मेरा विनम्र निवेदन है कि आप सभी रामायण को जरुर से जरुर पढ़ें और अपने जीवन में उतारें|अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट अच्छा लगा अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message के द्वारा बता सकते हैं|

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