महात्मा गाँधी का जीवन परिचय in Hindi

दोस्तों राष्ट्रपिता महात्मा के बारे में कौन नही जानता अहिंसा और सत्याग्रह के संघर्ष से उन्होंने भारत को अंग्रेजो से स्वतंत्रता दिलाई|उनका ये काम पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया|वो हमेशा कहते थे बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो, और उनका ये भी मानना था की सच्चाई कभी नहीं हारती|इस महान इन्सान को भारत ने राष्ट्रपिता घोषित कर दिया|आज मै आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने जा रहा हूँ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के बारे में|वैसे हम सभी भली भांति गाँधी जी से परिचित है और बचपन से ही उनके बारे में सुनते चले आ रहे है|हमारी भारत भूमि ऐसे महान् पुरुषों की जन्मस्थली, कर्मस्थली रही है जिन्होंने अपनी कार्यशैली से न केवल समूचे जनमानस को प्रेरणा दी बल्कि अपने व्यक्तित्व एवं कार्यों का प्रकाश भारतवर्ष में ही नहीं विश्व-भर में फैलाया|ऐसे महामानव राष्ट्रवादी नायक थे हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी|

महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

आप सभी जानते है महात्मा गाँधी समुच्च मानव जाति के लिए मिशाल हैं|उन्होंने हर परिस्थिति में अहिंसा और सत्य का पालन किया और लोगों से भी इनका पालन करने के लिये कहा|उन्होंने अपना जीवन सदाचार में गुजारा|वह सदैव परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल पहनते थे|सदैव शाकाहारी भोजन खाने वाले इस महापुरुष ने आत्मशुद्धि के लिये कई बार लम्बे उपवास भी रक्खे|साथ ही आपने अपना सारा जीवन राष्ट्रहित में ही समर्पित कर दिया|आपको बताये गांधी जी ने अपना जीवन सत्य, या सच्चाई की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया|उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने करने के लिए अपनी स्वयं की गल्तियों और खुद पर प्रयोग करते हुए सीखने की कोशिश की|उन्होंने अपनी आत्मकथा को सत्य का नाम  का नाम दिया|

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महात्मा गाँधी का जीवन परिचय –

दोस्तों युगपुरुष, महामानव महात्मा गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबन्दर में हुआ था । उनके पिता का नाम करमचन्द गांधी एवं माता का नाम पुतलीबाई था| गांधीजी के पिता राजकोट के दीवान थे|उनकी माताजी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं, जिनके विचारों का गांधीजी पर विशेष प्रभाव पड़ा|गांधीजी की प्रारम्भिक शिक्षा राजकोट में हुई थी| सन् 1881 में उन्होंने हाईस्कूल में प्रवेश ले लिया था| उनका विवाह तेरह वर्ष की अवस्था में कस्तूरबा बाई से हो गया था|सन् 1887 में गांधीजी ने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और भावनगर के सामलदास कॉलेज में प्रवेश ले लिया, किन्तु परिवारवालों के कहने पर उन्हें अपनी शेष पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैण्ड जाना पड़ा|इंग्लैण्ड में उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की|

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  1. My Experiments with Truth (Hindi Edition): Autobiography (Hindi Classics)
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महात्मा गांधी के नाम से मशहूर मोहनदास करमचंद गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक नेता थे| सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धान्तो पर चलकर उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई|उनके इन सिद्धांतों ने पूरी दुनिया में लोगों को नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता आन्दोलन के लिये प्रेरित किया|उन्हें भारत का राष्ट्रपिता भी कहा जाता है|सुभाष चन्द्र बोस ने वर्ष 1944 में रंगून रेडियो से गान्धी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहकर सम्बोधित किया था|

शिक्षा –

महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

दोस्तों आपको बताये मोहनदास अपने परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे थे इसलिए उनके परिवार वाले ऐसा मानते थे कि वह अपने पिता और चाचा का उत्तराधिकारी (दीवान) बन सकते थे| उनके एक परिवारक मित्र मावजी दवे ने ऐसी सलाह दी कि एक बार मोहनदास लन्दन से बैरिस्टर बन जाएँ तो उनको आसानी से दीवान की पदवी मिल सकती थी|उनकी माता पुतलीबाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके विदेश जाने के विचार का विरोध किया पर मोहनदास के आस्वासन पर राज़ी हो गए|

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सन 1888 में मोहनदास यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन में कानून की पढाई करने और बैरिस्टर बनने के लिये इंग्लैंड चले गये|अपने माँ को दिए गए वचन के अनुसार ही उन्होंने लन्दन में अपना वक़्त गुजारा| वहां उन्हें शाकाहारी खाने से सम्बंधित बहुत कठिनाई हुई और शुरूआती दिनो में कई बार भूखे ही रहना पड़ता था|धीरे-धीरे उन्होंने शाकाहारी भोजन वाले रेस्टोरेंट्स के बारे में पता लगा लिया|इसके बाद उन्होंने ‘वेजीटेरियन सोसाइटी’ की सदस्यता भी ग्रहण कर ली|इस सोसाइटी के कुछ सदस्य थियोसोफिकल सोसाइटी के सदस्य भी थे और उन्होंने मोहनदास को गीता पढने का सुझाव दिया|

गांधीजी की प्रारम्भिक शिक्षा राजकोट में हुई थी|सन् 1881 में उन्होंने हाईस्कूल में प्रवेश ले लिया था|उनका विवाह तेरह वर्ष की अवस्था में कस्तूरबा बाई से हो गया था|सन् 1887 में गांधीजी ने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और भावनगर के सामलदास कॉलेज में प्रवेश ले लिया, किन्तु परिवारवालों के कहने पर उन्हें अपनी शेष पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैण्ड जाना पड़ा|इंग्लैण्ड में उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की|

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का संघर्ष (1916-1945) –

महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

सन् 1917 में गांधीजी ने भारतीय मजदूरों के बंधक बनाये जाने का विरोध किया| सन् 1918 में सूती मिल श्रमिकों की मांगों को लेकर सत्याग्रह किया|1919 में रोलेट एक्ट का विरोध किया|1920 में टर्की के सुलतान कमाल पाशा को इस्लाम के पवित्र स्थानों पर एकाधिकार से वंचित करने पर ब्रिटिश सरकार का विरोध किया और केसर ए हिन्द पदक, बोअर युद्ध पदक, जूलू युद्ध पदक लौटा दिये|1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा का विरोध करते हुए 5 दिन का उपवास किया| 1922 में सत्याग्रह प्रारम्भ किया|6 अप्रैल 1930 में दांडी यात्रा कर नमक कानून तोड़ा|गोरी सरकार की विभिन्न नीतियों का विरोध करते हुए उन्होंने दिसम्बर 1931 में पुन: सत्याग्रह किया|

वर्ष 1914 में गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौट आये|इस समय तक गांधी एक राष्ट्रवादी नेता और संयोजक के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके थे|वह उदारवादी कांग्रेस नेता गोपाल कृष्ण गोखले के कहने पर भारत आये थे और शुरूआती दौर में गाँधी के विचार बहुत हद तक गोखले के विचारों से प्रभावित थे| प्रारंभ में गाँधी ने देश के विभिन्न भागों का दौरा किया और राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को समझने की कोशिश की|1931 से 1940 तक विभिन्न आन्दोलन में सजा भुगत चुके गांधी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अंग्रेज सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में 1942 में करो या मरो तथा अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन छेड़ दिया, जिसका इतना अधिक देशव्यापी प्रभाव पड़ा कि सारे भारतवासी इस आन्दोलन में कूद पड़े|अन्तत: अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा| 15 अगस्त 1947 को देश स्वतन्त्र हो गया|

असहयोग आन्दोलन –

आपको बताये गाँधी जी का मानना था की भारत में अंग्रेजी हुकुमत भारतियों के सहयोग से ही संभव हो पाई थी और अगर हम सब मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ हर बात पर असहयोग करें तो आजादी संभव है|गाँधी जी की बढती लोकप्रियता ने उन्हें कांग्रेस का सबसे बड़ा नेता बना दिया था और अब वह इस स्थिति में थे कि अंग्रेजों के विरुद्ध असहयोग, अहिंसा तथा शांतिपूर्ण प्रतिकार जैसे अस्त्रों का प्रयोग कर सकें|इसी बीच जलियावांला नरसंहार ने देश को भारी आघात पहुंचाया जिससे जनता में क्रोध और हिंसा की ज्वाला भड़क उठी थी|

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स्वराज और नमक सत्याग्रह –

महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

असहयोग आन्दोलन के दौरान गिरफ़्तारी के बाद गांधी जी फरवरी 1924 में रिहा हुए और सन 1928 तक सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे|इस दौरान वह स्वराज पार्टी और कांग्रेस के बीच मनमुटाव को कम करने में लगे रहे और इसके अतिरिक्त अस्पृश्यता, शराब, अज्ञानता और गरीबी के खिलाफ भी लड़ते रहे|

हरिजन आंदोलन –

दलित नेता डॉ बी आर अम्बेडकर की कोशिशों के परिणामस्वरूप अँगरेज़ सरकार ने अछूतों के लिए एक नए संविधान के अंतर्गत पृथक निर्वाचन मंजूर कर दिया था|येरवडा जेल में बंद गांधीजी ने इसके विरोध में सितंबर 1932 में छ: दिन का उपवास किया और सरकार को एक समान व्यवस्था (पूना पैक्ट) अपनाने पर मजबूर किया|अछूतों के जीवन को सुधारने के लिए गांधी जी द्वारा चलाए गए अभियान की यह शुरूआत थी|8 मई 1933 को गांधी जी ने आत्म-शुद्धि के लिए 21 दिन का उपवास किया और हरिजन आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए एक-वर्षीय अभियान की शुरुआत की|अम्बेडकर जैसे दलित नेता इस आन्दोलन से प्रसन्न नहीं थे और गांधी जी द्वारा दलितों के लिए हरिजन शब्द का उपयोग करने की निंदा की|

महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

दोस्तों इस तरह गाँधी जी सबके दिल में बॉस करने लगे थे और आज भी वो सबके दिल पर राज कर रहे है आपको बताये अगर कोई राष्ट्रभक्त हुआ तो उसमे सबसे पहले गाँधी जी का नाम लिया जाता है|अब मै समझ सकता हु आप सभी को मेरा ये पोस्ट अच्छा लगा होगा अगर आपने मेरे द्वारा पोस्ट किये गए आर्टिकल को अच्छे से पढ़े होंगे तो आपको गाँधी जी से जुडी साडी जानकारी मिल गयी होगी|

महात्मा गांधी के स्लोगन जो आप लोग ज़रूर ज़िंदगी भर याद रखना चाहेंगे –

  • जहाँ पवित्रता है, वहीं निर्भयता है।
  • कानों का दुरुपयोग मन को दूषित और अशांत करता है।
  • विश्व में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इतने भूखे हैं कि भगवान् उन्हें किसी और रूप में नहीं दिख सकता, सिवाय रोटी देने वाले के रूप में।
  • किसी की मेहरबानी माँगाना, अपनी आजादी बेचना है।
  • आँख के बदले में आँख पूरे दुनीया को अँधा बना देगी।
  • जब आपका सामना किसी विरोधी से हो, तो उसे प्रेम से जीतें, अहिंसा से जीते।
  • दिल की कोई भाषा नहीं होती, दिल – दिल से बात करता है।
  • आप कभी भी यह नहीं समझ सकेंगे की आपके लिए कौन महत्त्वपूर्ण है जब तक की आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देंगे।
  • इंसान हमेशा वो बन जाता है जो वो होने में वो यकीन करता है। अगर मैं खुद से यह कहता रहूँ कि मैं इस चीज को नहीं कर सकता, तो यह संभव है कि मैं शायद सचमुच में वो करने में असमर्थ हो जाऊं। और इसके विपरीत अगर मैं यह यकीन करूँ कि मैं ये कर सकता हूँ, तो मैं निश्चित रूप से उसे करने की क्षमता पा ही लूँगा, फिर भले ही शुरू में मेरे पास वो क्षमता ना रही हो।

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