महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

दोस्तों, महादेवी वर्मा जी हिंदी साहित्य जगत की ऐसी महान कवि रही हैं जिन्होंने अपना सारा जीवन देश प्रेम और सामाजिक कार्यों में लगा दिया और अपना सर्वस्व नेवछावर कर दिया| महादेवी वर्मा का जन्म 24 मार्च 1907 ई में होली के दिन फर्रुखाबाद,उत्तर प्रदेश के संपन्न कायस्थ परिवार में हुआ था|आरंभिक शिक्षा इंदौर में हुई जहां महादेवी जी के पिता शिक्षक थे|पिता ने पुत्री की प्रारंभिक शिक्षा हेतु घर पर ही शिक्षक की भी व्यवस्था कर रखी थी|नौ वर्ष की अल्प आयु में उनका विवाह कर दिया गया, किंतु बालिका महादेवी का विद्रोही मन संस्कारों से बोझिल दांपत्य जीवन की आरोपित व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सका|उन्होंने पुनः क्रास्थवेट कॉलेज प्रयाग 1919 ई में अपना अध्यन आरंभ किया तथा मिडिल परीक्षा में पूरे प्रांत में प्रथम स्थान प्राप्त किया|

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

आपको बताये आधुनिक हिंदी साहित्य में सबसे अधिक चर्चित और लोकप्रिय काल छायावाद है|इस काल की प्रमुख कवियों में जिस कवियित्री का नाम सबसे ऊपर है वो हैं महादेवी वर्मा जी|दोस्तों छायावाद अंग्रेजी साहित्यिक काल स्वछान्तावाद के सम कालीन ही था|सभी जानते हैं भक्तिकाल की मीरा जी के तरह इनका भी प्रेम अलौकिक था और उसमे रहस्य की प्रचुर मात्रा थी|इनके साहित्यिक काव्यगत विशेषताओं के कारण इन्हें आधुनिक मीरा भी कहा जाता है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आप सभी को महादेवी वर्मा जी के बारे बताने जा रहा हूँ साथ ही इनके जीवन से जुडी कुछ अहम् जानकारी साझा करने जा रहा हूँ जो बेहद जरुरी है आइये जानते हैं|

इसे भी पढ़ें – इंदिरा गाँधी जी का जीवन परिचय|

महादेवी वर्मा जी का जीवन परिचय –

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

पूरा नाम – महादेवी वर्मा|

जन्म – 26 मार्च 1907|

जन्म स्थान – फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश|

विवाह – डॉ स्वरुप नारायण वर्मा|

दोस्तों महादेवी वर्मा का जन्म 24 मार्च 1907 ईस्वी में होली के दिन फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) के संपन्न कायस्थ परिवार में हुआ था|आरंभिक शिक्षा इंदौर में हुई जहां महादेवी जी के पिता शिक्षक थे|पिता ने पुत्री की प्रारंभिक शिक्षा हेतु घर पर ही शिक्षक की भी व्यवस्था कर रखी थी|आपको बताये नौ वर्ष की अल्प आयु में उनका विवाह कर दिया गया, किंतु बालिका महादेवी का विद्रोही मन संस्कारों से बोझिल दांपत्य जीवन की आरोपित व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सका| उन्होंने पुनः क्रास्थवेट कॉलेज प्रयाग (1919 ई) में अपना अध्यन आरंभ किया तथा मिडिल परीक्षा में पूरे प्रांत में प्रथम स्थान प्राप्त किया|

महादेवी वर्मा के हृदय में शैशवावस्था से ही जीव मात्र के प्रति करुणा थी, दया थी|उन्हें ठण्डक में कूँ कूँ करते हुए पिल्लों का भी ध्यान रहता था|पशु-पक्षियों का लालन-पालन और उनके साथ खेलकूद में ही दिन बिताती थीं|चित्र बनाने का शौक भी उन्हें बचपन से ही था|इस शौक की पूर्ति वे पृथ्वी पर कोयले आदि से चित्र उकेर कर करती थीं|उनके व्यक्तित्व में जो पीडा, करुणा और वेदना है| विद्रोहीपन है, अहं है, दार्शनिकता एवं आध्यात्मिकता है|अपने काव्य में उन्होंने जिन तरल सूक्ष्म तथा कोमल अनुभूतियों की अभिव्यक्ति की है, इन सब के बीज उनकी इसी अवस्था में पड़ चुके थे और उनका अंकुरण तथा पल्लवन भी होने लगा था|

इसे भी पढ़ें – कबीरदास जी का जीवन परिचय|

रचनाएँ –  (कविता)

“कितनी करूणा कितने संदेश

पथ में बिछ जाते बन पराग

गाता प्राणों का तार तार

अनुराग भरा उन्माद राग

आँसू लेते वे पथ पखार

जो तुम आ जाते एक बार

हँस उठते पल में आर्द्र नयन|”

कविता संग्रह –

  • नीहार|
  • रश्मि|
  • दीपशिखा|
  • नीरजा|
  • सांध्यगीत|
  • अग्नि रेखा|
  • प्रथम आयाम|

“मैं नीर भरी दुःख की बदली

स्पंदन में चिर निस्पंद बसा

क्रंदन में आहत विश्व हँसा

नयनो में दीपक से जलते

पलकों में निर्झनी मचली

मैं नीर भरी दुःख की बदली

मेरा पग पग संगीत भरा..|”

महादेवी वर्मा (गद्य साहित्य) –

  • रेखाचित्र – अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएं|
  • संस्मरण – पथ के साथी, मेरा परिवार|
  • निबंध –  श्रृंखला की कड़ियाँ, विवेचनात्मक गद्य, साहित्यकार की आस्था|
  • कहानियाँ – गिल्लू|

इसे भी पढ़ें – गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन परिचय|

“बया हमारी चिड़िया रानी

तिनके लाकर महल बनाती,

ऊँची डालों पर लटकाती

खेतों से फिर दाना लाती,

नदियों से भर लाती पानी|

तुझको दूर न जाने देंगे

दानों से आँगन भर देंगे,

और हौज में भर देंगे हम

मीठा-मीठा पानी|

फिर अंडे सेयेगी तू जब…|”

आप सभी को बताना चाहूँगा महादेवी जी ने अपने जीवन द्वारा समाज सेविका एवं साहित्य सेविका की फाँक को मिटाने का प्रयास किया|दोस्तों न केवल कविता में स्त्री का भावात्मक इतिहास लिखा अपितु गद्य में विविध विधाओं द्वारा गरीब, दलित, चर्चित नारी, बच्चों, विधवाओं को प्रमुख वर्ण्य विषय बनाकर नवजागरण का प्रयास किया|श्रृंखला की कड़ियां, स्मृति की रेखाएं, चांद, का संपादन उनके विशिष्ट है|हिंदी साहित्य और भाषा के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है|इस तरह उनका अलग ही स्थान रहा है|

इसे भी पढ़ें – सूरदास जी का जीवन परिचय|

दोस्तों अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत बेहद पसंद आया होगा अगर आप सभी ने मेरे इस post को अच्छे से read किये होंगे तो आप सभी को जरुरी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको मेरा ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो हमे जरुर बताये और अगर आपको क्कुह पूछना या बताना हो कुछ तो नीचे message box में comment कर बता सकते हैं|

One thought on “महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.