महा शिवरात्रि की Date और पूरी जानकारी In Hindi

दोस्तों, महा शिवरात्रि भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है जिसे पूरे भारत में बड़े उत्साह और प्रसन्नता के साथ मनाया जाता है|आपको बताऊ फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह त्यौहार पुरे भारत में शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है|यह पर्व देवों के देवों महादेव को समर्पित है|जिसके पीछे मुख्यतः दो मान्यताएं मानी जाती है|लोगों की मान्यता है की सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था|जबकि कुछ का मानना है की इस दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से हुआ था|

महा शिवरात्रि की date और पूरी जानकारी

आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको महा शिवरात्रि के बारे में बताने जा रहा हूँ साथ ही आपको कुछ इतिहास भी बताता हूँ उम्मीद है आपको बेहद पसंद आएगा|वैसे तो वर्ष भर में 12 शिवरात्रियां आती है लेकिन इन सभी में फाल्गुन माह की शिवरात्रि को सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता है|वैसे तो इस व्रत को कोई भी रख सकता है लेकिन महिलाएं और लड़कियां इस व्रत को बड़े शौक से रखती है|माना जाता है, इस व्रत के प्रभाव से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है और जिन महिलाओं का विवाह हो चुका है उनके पति का जीवन और स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहता है|

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महा शिवरात्रि पर विशेष –

दोस्तों इस बार यानि 2018 में हम सभी महा शिवरात्रि का पर्व 13 फरवरी दिन मंगलवार को मनाएंगे|महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था|जो समुद्र मंथन के समय बाहर आया था|यह त्योहार पूरे भारतवर्ष, नेपाल, बांग्लादेश और दुनिया के उन सभी हिस्सों में मनाया जाता है जहाँ हिंदू जनसंख्या ज्यादा है|


आपको बताता चलू यह त्योहार ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार फरवरी या मार्च में पड़ता है|हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह फाल्गुन मास के 14वें दिन और 13वीं रात्रि को पड़ता है, माना जाता है कि यह दिन भगवान शिव का “वर्ष का पसंदीदा दिन” है|हिन्दू वर्ष के दौरान मनाये जाने वाले बारह शिवरात्रि उत्सवों में से महा शिवरात्रि को सबसे पवित्र माना जाता है|

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महा शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है –

महा शिवरात्रि की date और पूरी जानकारी

आपको बताये एक बार पार्वती जी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, ‘ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं|उत्तर में शिवजी ने पार्वती को ‘शिवरात्रि’ के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई ‘एक बार चित्रभानु नामक एक शिकारी था|पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था|वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका|क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया|संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी|

  • संपूर्ण भारत में हिन्दू मंदिरों के आसपास होने वाले उत्सवों और मेलों में जाएँ|मंदिर दीयों, फूलों और अन्य सजावटों से युक्त होंगे, और कई पर्यटक इसमें शामिल होते हैं|उत्तर भारत के मंडी शहर में होने वाला कार्यक्रम संभवतः सबसे बड़ा होता है जहाँ 81 मंदिर हैं|मध्य भारत में, महा शिवरात्रि के उत्सव के लिए महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध दर्शन स्थलों में से एक है|दक्षिण भारत में, कर्नाटक में विश्वनाथ मंदिर के पास होने वाले कार्यक्रम सबसे महत्वपूर्ण होते हैं|
  • यदि आप चाहें तो महा शिवरात्र से जुड़ी कुछ कहानियों के बारे में जान सकते हैं|उदाहरण के लिए, एक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान विष का घड़ा निकलने पर संसार को बचाने के लिए शिवजी ने इसे स्वयं पी लिया था|लेकिन उन्होंने इसे निगला नहीं|वैसे इसकी वजह से उनका गला नीला पड़ गया|एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार एक आदमी जंगल में लकड़ियां चुनने के लिए गया और उसे वहां रात हो गयी|
  • वह सुरक्षित रहने के लिए पेड़ पर चढ़ गया, और जगे रहने के लिए (और पेड़ से गिरने से बचने के लिए), उसने भगवान शिव का नाम लेते हुए पेड़ की पत्तियों को तोड़कर एक-एक करके गिराना शुरू कर दिया|संयोग से, पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था, और चूँकि शिवजी को यह अनुभव बहुत पसंद आया, इसीलिए वर्तमान में भगवान शिव का रात में जप किया जाता है और उन्हें बेलपत्र चढ़ाये जाते हैं|
  • महा शिवरात्रि को भारत में वसंत ऋतु के आगमन और विशेष रूप से फूलों के खिलने से जोड़ा जाता है|इसलिए आप बैंगलोर के लालबाग बॉटनिकल गार्डन और इसके प्रसिद्ध फूलों के पौधे और “हाउस ऑफ ग्लास” देखने जा सकते हैं|यहाँ एक झील और उष्णकटिबंधीय पक्षी अभयारण्य भी है|एक दूसरा विकल्प पश्चिम हिमालय के राज्य में फूलों की घाटी का राष्ट्रीय उद्यान भी हो सकता है|यह पहाड़ पूरी तरह से अल्पाइन फूलों से ढंका होता है|

आपको बताऊ शिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है|इस दिन सभी महिलाएं प्रातः काल जागकर स्नान आदि करके भगवान शिव के मंदिर जाती है|वहां शिवलिंग का जलाभिषेक कर दुग्धाभिषेक करती है|इसके बाद वे शिव जी को फूल आदि अर्पित कर उन्हें टीका लगाती है|तत्पश्चात वे उन्हें बेलपत्र, भांग, धतूरा, आख आदि फल-फूल चढाती है|ऐसा माना जाता है की सामान्य फलों और मिठाइयों की तुलना में शिव जी ये जंगली फल अधिक पसंद आते है|

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दोस्तों इस दिन शिवलिंग पर धतूरा और बेलपत्र चढ़ाने का खास महत्व होता है|इसके बाद वे उन्हें किसी मीठी चीज से भोग लगाती है|भोग लगाने के पश्चात् धुप दिप आदि जलाकर उनकी पूजा अर्चना करती है और शिव जी की आरती जाती है|इस दिन उपवास रखने का बेहद ख़ास महत्व होता है|अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बेहद पसंद आया होगा अगर आपको मेरा ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो नीचे comment कर हमे जरुर बताये साथ ही अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे बता सकते हैं|

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