लता मंगेश्कर Biography In Hindi

दोस्तों संगीत की देवी लता मंगेश्कर जी सुरों की मल्लिका और सबसे लोकप्रिय गायिका है|जिनके स्वर के बारे में और उनके गले के बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया की आखिर इतनी उम्र के बाद भी इतनी पतली और मीठी आवाज का आखिर राज क्या है|शायद कोई हो जिसने लता जी के गीत न सुना हो|स्वर कोकिला लता जी के बारे में सभी जानते है|सदियों से उनके गीत भी सुनते चले आ रहे है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको बताने जा रहा हु लता जी के बारे में उनसे जुडी कुछ अहम् जानकारी और उनका जीवन परिचय|

लता मंगेश्कर biography in hindi

आपको बताना चाहूगा की अगर सबसे अधिक गाना किसी ने गाया है तो गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी लता जी का नाम सबसे ऊपर आता है|लता जी का नाम पुरे विश्व में गाने के लिए मशहूर है सभी लोग इनके गाने को पसंद भी करते है|आपको बताये अमेरिका के वैज्ञानिक ने कहा की ऐसी आवाज न तो कभी सुनी और न ही सुनेंगे|ऐसी है हमारी लता जी|गीत, संगीत गायन और आवाज की जादूगरी की जब भी चर्चा होती है सहज ही एक ही नाम होठो पर आता है लता मंगेशकर|उन्हें संगीत की दुनिया में सरस्वती का अवतार माना जाता है|आइये जानते है उनका जीवन परिचय|

लता मंगेश्कर का जीवन परिचय –

पूरा नाम             – लता मंगेश्कर|

जन्म                   – 28 सितम्बर 1924|

जन्म स्थान           – इंदौर, मध्यप्रदेश|

माता पिता             – शेवंती मंगेश्कर, दीनानाथ मंगेश्कर|

बहन भाई              – मीना, आशा, उषा, हृदयनाथ|

लता मंगेश्कर का जन्म 28 सितम्बर 1924 को इंदौर मध्यप्रदेश में हुआ था|इनके पिता पं दीनानाथ मंगेश्कर एक मराठी परिवार से है और इनके पिता खुद एक शास्त्रीय संगीत गायक और थिएटर एक्टर थे|जिनसे लता को बहुत सीख मिली और मदद भी|लता का बचपन का नाम हेमा था लेकिन पिता ने बाद में इसे बदलकर लता कर दिया था क्योंकि वो उनके पिता के नाटको में एक महिला किरदार लतिका से प्रेरित था|लता जी अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी थी| उनकी तीन बहने मीना ,आशा ,उषा और एक भाई हृदयनाथ है|लता मंगेशकर ने जीवन का पहला पाठ अपने पिता से ही सीखा था|सिर्फ 5 साल की उम्र में लता जी ने अपने पिता के एक नाटक में अभिनय किया था|लता जी जब पहली बार स्कूल गयी तब वो कक्षा के दुसरे बच्चो को संगीत सिखाने लगे गयी तब ऐसा करने से अध्यापक ने उन्हें रोका तो वो बहुत नाराज हुयी और उस दिन से स्कूल जाना छोड़ दिया|इस तरह लता जी अपने जीवन में एक दिन ही स्कूल गयी थी|कुछ तथ्य बताते है कि लता जी ने इसलिए स्कूल छोड़ा कि वो अपनी बहन आशा को साथ लाने के लिए स्कूल वालो ने मना किया था|

लता जी का फ़िल्मी सफ़र –

लता बचपन से ही गायक बनना चाहती थीं। बचपन में कुंडल लाल सहगल की एक फ़िल्म चंडीदास देखकर उन्होने कहा था कि वो बड़ी होकर सहगल से शादी करेगी। पहली बार लता ने वसंग जोगलेकर द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म कीर्ती हसाल के लिये गाया। उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता फ़िल्मों के लिये गाये इसलिये इस गाने को फ़िल्म से निकाल दिया गया। लेकिन उसकी प्रतिभा से वसंत जोगलेकर काफी प्रभावित हुये।

दोस्तों पिता की मृत्यु के बाद लता को पैसों की बहुत किल्लत झेलनी पड़ी और काफी संघर्ष करना पड़ा|तब उनकी उम्र 13 साल की थी|उन्हें अभिनय बहुत पसंद नहीं था लेकिन पिता की असामयिक मृत्यु की वज़ह से पैसों के लिये उन्हें कुछ हिंदी फ़िल्मों में काम करना पड़ा|अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फ़िल्म पाहिली मंगलागौर  रही, जिसमें उन्होंने स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई|बाद में उन्होंने कई फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें, माझे बाल, चिमुकला संसार (1943), गजभाऊ , बड़ी माँ , जीवन यात्रा, माँद  शामिल थी|बड़ी माँ, में लता ने नूरजहाँ के साथ अभिनय किया और उसके छोटी बहन की भूमिका निभाई आशा ने|उन्होंने खुद की भूमिका के लिये गाने भी गाये और आशा के लिये पार्श्वगायन किया|

दोस्तों आपको बताये शायद ही ऐसा कोई संगीत निर्देशक होगा जिसके लिए लता जी ने गाना न गाया हो|1950 के दशक में अनिल विश्वास से लेकर कल्याणजी आनन्द जी जैसे दिग्गज संगीत निर्देशकों के लिए लता जी ने गाने गाये थे| लता मंगेशकर ने दो आँखे बारह हाथ ,मदर इंडिया ,मुगल-ए-आजम आदि महान फिल्मो में गाने गाये|उनके “महल” “बरसात” “एक थी लडकी” “बड़ी बहन” आदि फिल्मो में अपनी आवाज के जादू से इन फिल्मो की लोकप्रियता में चार चाँद लगाये|सात दशक की लता जी की स्वर यात्रा में उनकी  ख्याति इतनी प्रबल हो गये थी|उनके गायकी का जादू था कि ना केवल 70 और 80 के दशक बल्कि 90 के दशक में भी उनके गानों की धूम रही थी|

इसके बाद यश चोपड़ा ने तो अपनी लगभग सभी फिल्मो में उनसे गाने गंवाए थे जो आज भी लोगो की जबान पर है|लता जी एक सिद्धि भी थी जिसकी भाषा और उच्चारण की खिल्ली उड़ाई गयी थी , एक दिन सभी भाषाओ पर उनका प्रभुत्व स्थापित हो गया|लोग उनसे उच्चारण सीखने लगे|फ़िल्मी गीतों के अतिरिक्त गैर फ़िल्मी गीतों और भजनों की भी रिकॉर्डिंग होती रही|सरकारी सम्मान के लिए भी जहा तहां लता जी को ही बुलाया जाता था|चीनी आक्रमण के समय कवि प्रदीप के अमर गीत “ए मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भर लो पानी ” गाने के लिए लता जी को दिल्ली बुलवाया गया था|यह गीत सुनकर नेहरु जी रो पड़े थे|लता जी आज भी बिलकुल स्वस्थ्य और संगीत की दुनिया में सक्रिय है|आज भी वो वैसे ही है और गाने और सुरों की बात ही क्या|

भारत रत्न लता मंगेशकर अवार्ड्स –

  • भारत रत्न|
  • पद्म भूषण|
  • दादा साहब फाल्के पुरस्कार|
  • फिल्मफेयर अवार्ड 6 बार|
  • राष्ट्रिय पुरस्कार 4 बार|
  • महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार 2 बार|
  • राजीव गाँधी पुरस्कार|
  • लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड|
  • नूर जहाँ पुरस्कार आदि|

दोस्तों लता जी के गाने सुन लेने के बाद दिल और मन बहुत शांत हो जाता है और एक अलग ही चेतना आ जाती है|आज मैंने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से लता जी से जुडी कुछ अहम् जानकारी देने की कोशिश करी अगर आपने अच्छे से मेरे इस पोस्ट को पढ़ा होगा तो आपको अच्छे से जानकारी मिल गयी होगी|

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