सुनील दत्त का जीवन परिचय

दोस्तों, सुनील दत्त हिंदी सिनेमा जगत के महान अभिनेता रहे हैं जिनका असली नाम बलराज दत्त था भारतीय फिल्मों के विख्यात अभिनेता, निर्माता व निर्देशक थे|जिन्होंने कुछ पंजाबी फिल्मों में भी अभिनय किया|इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय राजनिति में भी सार्थक भूमिका निभायी|मनमोहन सिंह की सरकार में 2004 से 2005 तक वे खेल एवं युवा मामलों के कैबिनेट मन्त्री रहे|उनके पुत्र संजय दत्त भी फिल्म अभिनेता हैं|आज इस पोस्ट के माध्यम से मै आपको सुनील दत्त जी के बारे में बताने जा रहा हूँ साथ ही आपको जीवन से जुडी कुछ अहम् बातें बताने जा रहा हूँ|

वैसे आपको बताये सुनील दत्त को जितनी कामयाबी फिल्मों में मिली उतने ही कामयाब वो राजनीति में भी रहे|हालांकि बॉलीवुड में उन्होंने ऐसा भी दौर देखा जब उन्हें फिल्में नहीं मिल रही थीं|बलराज दत्त उर्फ़ सुनील दत्त जी का जन्म पंजाब (तत्कालीन पाकिस्तान ) के झेलम जिले के खुर्दी गाँव में हुआ था|वह बचपन सही अभिनय के क्षेत्र में जाना चाहते थे|बलराज साहनी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता के रूप में उन दिनों स्थापित हो चुके थे इसे देखते हुए उन्होंने अपना नाम बलराज दत्त से बदल कर सुनील दत्त रख लिया|उनका बचपन यमुना नदी के किनारे मदाली गाँव में बीता जो हरियाणा प्रदेश में है|वह इसके बाद लखनऊ चले गये , जहा पर वह अख्तर नाम से अमीनाबाद गली में मुस्लिम औरत के घर पर रहे|कुछ समय बाद वो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई चले गये|तो चलिए अब हम सभी सुनील दत्त जी के जीवन परिचय पर प्रकास डालते हैं|

सुनील दत्त का जीवन परिचय

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सुनील दत्त का जीवन परिचय –

पूरा नाम – बलराज रघुनाथ दत्त|

उपनाम – सुनील दत्त|

जन्म – 6 जून 1929|

जन्म स्थान – गाँव खुर्दी, पंजाब(पाकिस्तान)|

पत्नी – नर्गिस दत्त|

बच्चे – संजय दत्त, प्रिया दत्त, नम्रता दत्त|

सुनील दत्त का जीवन परिचय

सुनील दत्त आज ही के दिन, 6 जून 1929 को झेलम में पैदा हुए थे जो अब पाकिस्तान में है|सुनील दत्त ने अपने छह दशकों लंबे फ़िल्मी करियर में 50 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय किया|उन्हें दुनिया को अलविदा कहे अब 10 बरस हो गए हैं|लेकिन सुजाता, मदर इंडिया, रेशमा और शेरा, मिलन, नागिन, जानी दुश्मन, पड़ोसन, जैसी फ़िल्मों के लिए वो हमेशा याद किए जाते रहेंगे|

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दोस्तों आपको बताये सुनील दत्त मुम्बई आकर सुनील दत्त ने मुंबई परिवहन सेवा के बस डिपो में चेकिंग क्लर्क के रुप में कार्य किया|जहाँ उनको 120 रुपए महीने के मिलते थे|फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए 1955 से 1957 तक सुनील दत्त संघर्ष करते रहे|हिन्दी सिनेमा जगत में अपने पैर जमाने के लिए वह ज़मीन की तलाश में एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भटकते रहे थे|उसके बाद सुनील दत्त ने ‘जय हिंद कॉलेज’ में पढ़कर स्नातक किया|सुनील दत्त ने रेडियो सिलोन की हिन्दी सेवा के उद्घोषक के तौर पर अपना कैरियर शुरू किया था|जहाँ वह फ़िल्मी कलाकारों का इंटरव्यू लिया करते थे|एक इंटरव्यू के लिए उन्हें 25 रुपये मिलते थे|यह दक्षिण एशिया की पचास के दशक मे सबसे लोकप्रिय रेडियो सेवा थी|

फ़िल्मी सफ़र –

सुनील दत्त का जीवन परिचय

दोस्तों सुनील दत्त अभिनय के साथ ही उन्होंने फ़िल्म निर्माण और निर्देशन में भी हाथ आजमाए|सुनील दत्त ने 1964 में एक प्रयोगधर्मी फ़िल्म ‘यादें’ बनाई थी|इस फ़िल्म का नाम सबसे कम कलाकार वाली फ़िल्म के रूप में गिनीज बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दर्ज है|इस फिल्म के आख़िरी सीन में नरगिस एक छोटे से किरदार में नज़र आई हैं|बाक़ी फ़िल्म में सुनील के अलावा कोई और एक्टर नहीं है|इस फ़िल्म की कहानी लिखी थी सुनील दत्त की पत्नी नरगिस दत्त ने|फ़िल्म में एक ऐसे पति की कहानी है जिसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई है और वो उससे जुड़ी बातों को याद करता है|

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आपको बताये मदर इन्डिया की सफलता के बाद उन्हें “साधना (1958)” , “मुझे जीने दो (1963)” ,“खानदान (1965)” , “पड़ोसन (1967)“ जैसी सफल फिल्मो में भारतीय दर्शको के बीच सफल अभिनेता के रूप में पहचान मिली|“गुमराह ” “वक्त” और “हमराज ” जैसी फिल्मो में निभाई गयी यादगार भूमिकाओ ने भी दर्शको के बीच लोकप्रिय किया|उनकी मल्टीस्टारर फिल्मो में  “नागिन ” , “जानी दुश्मन ” “काला धंधा गोर लोग ” “वतन के रखवाले ” “परम्परा ” तथा “क्षत्रिय ” आदि प्रमुख है|1993 की “क्षत्रिय” के बाद Sunil Dutt सुनील दत्त लगभग 10 वर्षो तक फिल्मो से दूर रहे|विधु विनोद चोपड़ा के जोर देने पर उन्होंने 2007 में प्रदर्शित फिल्म “मुन्ना भाइअ एम.बी .बी.एस” में अभिनय किया|

सुनील दत्त का जीवन परिचय

सुनील दत्त के सिने करियर पर नज़र डालने पर पता लगता है कि वह मल्टी स्टारर फ़िल्मों का अहम हिस्सा रहे है|फ़िल्म निर्माताओं को ऐसी फ़िल्मों में जब कभी अभिनेता की ज़रूरत होती थी वह उन्हें नज़र अंदाज़ नहीं कर पाते थे|सुनील दत्त की मल्टीस्टारर सुपरहिट फ़िल्मों में ‘नागिन’, ‘जानी दुश्मन’, ‘शान’, ‘बदले की आग’, ‘राज तिलक’, ‘काला धंधा गोरे लोग’, ‘वतन के रखवाले’, ‘परंपरा’, ‘क्षत्रिय’ आदि प्रमुख हैं|

फ़िल्म ‘यादें’ (1964) के साथ सुनील दत्त ने फ़िल्म निर्देशन में भी क़दम रखा|इस पूरी फ़िल्म में सिर्फ एक युवक की भूमिका थी जो अपने संस्मरण को याद करता रहता है|इस किरदार को सुनील दत्त ने निभाया था|उनकी यह फ़िल्म बहुत सफल नहीं रही, लेकिन भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा गई|

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दोस्तों इस तरह आज आप सभी ने जाना सुनील दत्त जी के बारे में और इनके जीवन से जुडी कुछ अच्छी सी जानकारी उम्मीद है आपको मेरा ये पोस्ट बेहद पसंद आया होगा अगर आपको मेरा ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो नीचे comment कर जरुर बताये साथ ही अगर आपको कुछ पूछना हो तो comment कर बता सकते हैं|

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