सुमित्रानंदन पन्त का जीवन परिचय

दोस्तों, सुमित्रानंदन पन्त जी हिंदी साहित्य जगत के ऐसे स्तंभ कवि रहे हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य को एक नया आयाम दिया और हिंदी को बुलंदियों तक पहुचाने में अपना सर्वस्व नेवछावर कर दिया|सुमित्रानंदन पन्त जी हिंदी साहित्य में छायावादी युग के स्तम्भ कवि है|आपको बताना चाहूँगा छायावादी युग में चार कवि रहे हैं जिसमे सुमित्रानंदन पन्त जी का भी नाम आता है इनमे जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी’निराला’ और रामकुमार वर्मा का युग कहा जाता है|आज इस आर्टिकल के द्वारा मै आप सभी को सुमित्रानंदन पन्त जी के बारे में बातें कर रहा हूँ साथ ही आज मै आपको पन्त जी के द्वारा  रचित कुछ कवितायेँ प्रस्तुत करने जा रहा हूँ जिसमे वो शांति है जो और किसी कविताओं में देखने को नही मिलती है|

सुमित्रानंदन पन्त का जीवन परिचय

आपको बताता चलू सुमित्रानंदन पंत जी का जन्म अल्मोड़ा ज़िले के कौसानी नामक ग्राम में 20 मई 1900 ई. को हुआ| जन्म के छह घंटे बाद ही उनकी माँ का निधन हो गया|उनका लालन-पालन उनकी दादी ने किया|उनका प्रारंभिक नाम गुसाई दत्त रखा गया|वे सात भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में हुई|1918 में वे अपने मँझले भाई के साथ काशी आ गए और क्वींस कॉलेज में पढ़ने लगे|वहाँ से माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण कर वे इलाहाबाद चले गए|उन्हें अपना नाम पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने अपना नया नाम सुमित्रानंदन पंत रख लिया|यहाँ म्योर कॉलेज में उन्होंने 12वीं में प्रवेश लिया|अब आइये जानते हैं उनके जीवन से जुडी कुछ अहम् बातें|

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सुमित्रानंदन पन्त जी का जीवन परिचय –

आपको बताये सुमित्रानंदन पन्त जी ऐसे कवि रहे हैं जिनकी भाषा शैली बहुत अच्छी रही है उनकी भाषा शैली संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली रही है|काव्यांजलि में आपने ऐसी रचनाएँ किये हैं जो बहुत ही मधुर है|आइयेआपके जीवन पर प्रकाश डालते हैं| 

सुमित्रानंदन पन्त का जीवन परिचय

पूरा नाम – सुमित्रानंदन पन्त|

जन्म 20 मई 1900|

जन्म स्थान – कौशानी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड|

मृत्यु – 28 दिसम्बर 1977|

मृत्यु स्थान – इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश|

दोस्तों सुमित्रानंदन पन्त जी की प्रारंभिक शिक्षा अल्मोड़ा में ही हुई|1918 में वे अपने भाई के साथ काशी आ गए और वहां क्वींस कॉलेज में पढने लगे|मेट्रिक उतीर्ण करने के बाद आप इलाहबाद आ गए|वहां इंटर तक अध्ययन किया|वे बहुत दिन तक अध्यापक रहे और बच्चों को अच्छी शिक्षाएं दिए|1919 में महात्मा गाँधी के सत्याग्रह से प्रभावित होकर अपनी शिक्षा अधूरी छोड़ दी और स्वाधीनता आन्दोलन में सक्रिय हो गए|हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी और बंगला का स्वाध्याय किया|आपका प्रकृति से असीम लगाव था|बचपन से ही सुन्दर रचनाएँ  लिखा करते थे|पन्त जी प्रकृति की ऐसी सुंदर रचनाएँ कविताओं के माध्यम से  सबके सामने प्रस्तुत किये हैं जिसमे सजीव का आभास होता है|

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“ज्यों ज्यों लगती है नाव पार 

उर में आलोकित शत विचार|

इस धरा सा ही जग का क्रम शाश्वत इस जीवन का उद्गम

शाश्वत है गति शाश्वत संगम|

शाश्वत नभ का नीला विकास, शाश्वत शशि का यह रजत हास,

शाश्वत लघु लहरों का विलास|

हे जग जीवन के कर्णधार चिर जन्म मरण के आर पार,

शाश्वत जीवन नौका विहार ?

मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान, जीवन का यह शाश्वत प्रमाण,

करता मुझको अमरत्व दान|” ………नौका विहार (काव्यांजलि)

दोस्तों 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के भारतीयों से अंग्रेजी विद्यालयों, महाविद्यालयों, न्यायालयों एवं अन्य सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करने के आह्वान पर उन्होंने महाविद्यालय छोड़ दिया और घर पर ही हिन्दी, संस्कृत, बँगला और अंग्रेजी भाषा-साहित्य का अध्ययन करने लगे|इलाहाबाद में वे कचहरी के पास प्रकृति सौंदर्य से सजे हुए एक सरकारी बंगले में रहते थे|उन्होंने इलाहाबाद आकाशवाणी के शुरुआती दिनों में सलाहकार के रूप में भी कार्य किया|उन्हें मधुमेह हो गया था|उनकी मृत्यु 28 दिसम्बर 1977 को हुई|

आपको बताऊ उत्तराखंड में कुमायुं की पहाड़ियों पर बसे कौसानी गांव में, जहाँ उनका बचपन बीता था|वहां का उनका घर आज ‘सुमित्रा नंदन पंत साहित्यिक वीथिका’ नामक संग्रहालय बन चुका है|इस में उनके कपड़े, चश्मा, कलम आदि व्यक्तिगत वस्तुएं सुरक्षित रखी गई हैं|संग्रहालय में उनको मिले ज्ञानपीठ पुरस्कार का प्रशस्तिपत्र, हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा मिला साहित्य वाचस्पति का प्रशस्तिपत्र भी मौजूद है|साथ ही उनकी रचनाएं लोकायतन, आस्था, रूपम आदि कविता संग्रह की पांडुलिपियां भी सुरक्षित रखी हैं|कालाकांकर के कुंवर सुरेश सिंह और हरिवंश राय बच्चन से किये गये उनके पत्र व्यवहार की प्रतिलिपियां भी यहां मौजूद है|संग्रहालय में उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष पंत व्याख्यान माला का आयोजन होता है|यहाँ से ‘सुमित्रानंदन पंत व्यक्तित्व और कृतित्व’ नामक पुस्तक भी प्रकाशित की गई है|उनके नाम पर इलाहाबाद शहर में स्थित हाथी पार्क का नाम सुमित्रा नंदन पंत उद्यान कर दिया गया है|

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रचनाएँ –

प्रमुख कृतियाँ –

  • वीणा|
  • उच्छावास|
  • पल्लव|
  • ग्रंथी|
  • गुंजन|
  • लोकायतन पल्लवणी|
  • मधु ज्वाला|
  • मानसी|
  • वाणी|
  • युग पथ|
  • सत्यकाम|

“अन्धकार की गुहा सरीखी, उन आँखों से डरता है मन,

भरा दूर तक उनमे दारुण, दैन्य दुःख का नीरव रोदन|”

“बाँध लिया तुमने प्राणों को फूलों के बंधन में,

एक मधुर जीवित आभा सी लिपट गई तुम मन में|

बाँध लिया तुमने मुझको स्वप्नों के आलिंगन में,

तन की सौ शोभाएँ सन्मुख चलती फिरती लगतीं|”

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दोस्तों, इस तरह सुमित्रानंदन पन्त जी ने ऐसी ऐसी अनुपम रचनाएँ की है जिसका कोई काट नही है और ऐसी मधुरतम और अलौकिक प्रेम नज़र आता है जो क्या कहना|आज मैंने आपको कुछ ऐसी रचनाएँ प्रस्तुत की है जो बहुत ही अच्छी है|अगर आप सभी अच्छे से मेरे इस आर्टिकल को पढेंगे तो उम्मीद के साथ कह सकता हूँ आप सभी को पन्त जी के जीवन से जुडी अधिक जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message box में comment कर बता सकते हैं|

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