सुरैया का जीवन परिचय In Hindi

दोस्तों, सुरैया जी का हिंदी सिनेमा जगत की ऐसी होनहार और सुप्रसिद्द अभिनेत्री और गायिका रही हैं जिसकी अदाकारा और सुरीली आवाज आज भी सभी के जहाँ में छिपी है|आपको बताये सुरैया जी का पूरा नाम सुरैया जमाल शेख| 40वें और 50वें दशक में इन्होंने हिंदी सिनेमा में अपना योगदान दिया|अदाओं में नज़ाकत, गायकी में नफ़ासत की मलिका सुरैया जमाल शेख़ ने अपने हुस्न और हुनर से हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक नई इबारत लिखी|वो पास रहें या दूर रहें, नुक़्ताचीं है ग़मे दिल और दिल ए नादां तुझे हुआ क्या है जैसे गीत सुनकर आज भी जहन में सुरैया की तस्वीर उभर आती है|

वैसे आपको बताये 15 जून 1929 को गुंजरवाला , पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान ) में जन्मी सुरैया अपने माता पिता की इकलौती सन्तान थी|नाजो से पली सुरैया ने हालांकि संगीत की शिक्षा नही ली थी लेकिन आगे चलकर उनकी पहचान एक बेहतरीन अदाकारा के साथ साथ एक अच्छी गायिका के रूप में भी बनी|उन्होंने अपने अभिनय और गायकी से हर कदम पर खुद को साबित किया है|तो अब आइये हम सभी जानते हैं सुरैया का जीवन परिचय|

सुरैया का जीवन परिचय

सुरैया का जीवन परिचय –

पूरा नाम – सुरैया जमाल शेख़|

जन्म – 15 जून 1929|

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जन्म स्थान – गुंजरवाला , पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान)|

मृत्यु – 31 जनवरी 2004|

मृत्यु स्थान – मुंबई|

दोस्तों आपको बताऊ वो पास रहें या दूर रहें, नुक़्ताचीं है ग़मे दिल, और दिल ए नादां तुझे हुआ क्या है जैसे गीत सुनकर आज भी जहन में सुरैया की तस्वीर उभर आती है|इस तरह उन्होंने बॉलीवुड में बहुत से गीत गए और कई फिल्मे की जो सुपरहिट रही|आज इस पोस्ट में मै आपको सुरैया जी से जुडी और भी कई जानकारी share करने जा रहा हूँ उम्मीद है आपको जरुर पसंद आएगा|

फ़िल्मी सफ़र –

सुरैया का जीवन परिचय

सुरैया जी के फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत बड़े रोचक तरीक़े से हुई|गुजरे ज़माने के मशहूर खलनायक जहूर सुरैया के चाचा थे और उनकी वजह से 1937 में उन्हें फ़िल्म ‘उसने क्या सोचा‘ में पहली बार बाल कलाकार के रूप में भूमिका मिली|1941 में स्कूल की छुट्टियों के दौरान वह मोहन स्टूडियो में फ़िल्म ‘ताजमहल’ की शूटिंग देखने गईं तो निर्देशक नानूभाई वकील की नज़र उन पर पड़ी और उन्होंने सुरैया को एक ही नज़र में मुमताज महल के बचपन के रोल के लिए चुन लिया|इसी तरह संगीतकार नौसाद ने भी जब पहली बार आल इंडिया रेडियो पर सुरैया की आवाज़ सुनी और उन्हें फ़िल्म ‘शारदा’ में गवाया|

इसके बाद 1947 में भारत की आज़ादी के बाद नूरजहाँ और खुर्शीद बानो ने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली, लेकिन सुरैया यहीं रहीं|अभिनय के अलावा सुरैया ने कई यादगार गीत दिए ,जो अब भी काफी लोकप्रिय है|इन गीतों में “सोचा न क्या मै दिल में दर्द बसा लाइ ” “तेरे नैनो ने चोरी किया ” “तू मेरा चाँद मै तेरी चांदनी ” “मुरली वाले मुरली बजा ” आदि शामिल है|1948 से 1951 तक केवल तीन वर्ष के दौरान वह ही ऐसी महिला कलाकार थी जिन्हें बॉलीवुड में सर्वाधिक पारिश्रामिक दिया जाता था|हिंदी फिल्मो में 40 से 50 का दशक सुरैया के नाम से कहा जा सकता है|उनकी लोकप्रियता का आलम  यह था कि उनकी एक झलक पाने के लिए उनके प्रशंशक मुम्बई में उनके घर के सामने घंटो खड़े रहते थे और यातायात जमा हो जाता था|

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फिल्मे –

सुरैया का जीवन परिचय

  • शमा (1961)
  • मिर्ज़ा ग़ालिब (1954)
  • दो सितारे (1951)
  • खिलाड़ी (1950)
  • सनम (1951)
  • कमल के फूल (1950)
  • शायर (1949)
  • जीत (1949)
  • विद्या (1948)
  • अनमोल घड़ी (1946)
  • हमारी बात (1943)

इसके बाद आपको बताये 31 जनवरी 2004 को सुरैया दुनिया को अलविदा कह गयी|संगीत का महत्व तो हमारे जीवन में हर पल रहेगा लेकिन सार्थक और मधुर गीतों की यदि बात आयेगी तो सुरैया का नाम जरुर आयेगा|उनका गाया गीत “वो पास रहे या दूर रहे ” उन पर काफी सटीक बैठता है|उनकी अदाए और भाव भंगिमाए उनकी गायकी के सबसे बड़ी विशेषता थी|अपने चेहरे के भाव से ही वे सभी भावो को प्रदर्शित कर देती थी|आज भी उनके कद्रदानो की कमी नही है|वह भले ही आज हमारे बीच नही है लेकिन उनका अभिनय ,उनका संगीत हमेशा हम सबको उनकी याद दिलाता रहेगा|

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दोस्तों इस तरह आज आप सभी ने इस पोस्ट के माध्यम से जाना सुरैया जी के बारे में आप सभी ने अगर मेरे इस पोस्ट को अच्छे से पढ़ा होगा तो आपको बहुत सी जानकारी मिल गयी होगी अगर आपको मेरा ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो नीचे comment कर जरुर बताये साथ ही अगर आपको कुछ पूछना या बताना हो तो नीचे message box में बता सकते हैं|

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