स्वामी विवेकानंद Biography In Hindi

दोस्तों आप सभी जानते है स्वामी विवेकानंद जी के बारे में|आप एक ऐसे महापुरुष हुए जिसने पूरे भारतवर्ष की संस्कृति और विराशत को एक नया रूप दिया और अपने देश का गौरव पूरे विश्व में बढाया|ऐसे महान व्यक्तित्व और सन्यासी के विषय में जो कुछ भी कहा जाये कम है|आपने भारत की संस्कृति को संवारने और साहित्य, दर्शन, इतिहास के प्रकांड विद्वान थे|स्वामी विवेकानंद जी एक ऐसे समाजसुधारक और विचारक थे जिनका सारा जीवन त्याग और वलिदान से घिरा हुआ था|पूरी जिंदगी आपने सन्यासी के रुप ही बिताया और आप एक दृढप्रतिज्ञ व्यक्ति थे|आपने अपना सारा जीवन भारत को संवारने और संजोने में ही बिताया|आप युवाओ के लिए प्रेरणास्रोत बन गए और जब तक संसार रहेगा आपका नाम अटल है अमर है|

स्वामी विवेकानंद Biography in hindi

दोस्तों भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को सूर्योदय से 6 मिनट पूर्व 6 बजकर 33 मिनट 33 सेकेन्ड पर हुआ|भुवनेश्वरी देवी के विश्वविजयी पुत्र का स्वागत मंगल शंख बजाकर मंगल ध्वनी से किया गया। ऐसी महान विभूती के जन्म से भारत माता भी गौरवान्वित हुईं|

स्वामी विवेकानंद जीवन परिचय –

पूरा नाम      –  नरेंद्रनाथ विश्वनाथ दत्त
जन्म            – 12 जनवरी 1863
जन्मस्थान    – कलकत्ता (पं. बंगाल)
पिता           – विश्वनाथ दत्त
माता          – भुवनेश्वरी देवी
शिक्षा        – 1884 मे बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण
विवाह       –  विवाह नहीं किया

स्वामी विवेकानंद जन्मनाम नरेंद्र नाथ दत्त भारतीय हिंदु सन्यासी और 19 वी शताब्दी के संत रामकृष्ण के मुख्य शिष्य थे|भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण दर्शन विदेशो में स्वामी विवेकानंद की वक्तृता के कारण ही पंहुचा|भारत में हिंदु धर्म को बढ़ाने में उनकी मुख्य भूमिका रही और भारत को औपनिवेशक बनाने में उनका मुख्य सहयोग रहा| विवेकानंद ने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की जो आज भी भारत में सफलता पूर्वक चल रहा है|उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुवात “मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनों” के साथ करने के लिए जाना जाता है| जो शिकागो विश्व धर्म सम्मलेन में उन्होंने ने हिंदु धर्म की पहचान कराते हुए कहे थे|माँ के मुहँ से रामायण, महाभारत के किस्से सुनना नरेन्द्र को बहुत अच्छा लगता था| बालयावस्था में नरेन्द्र नाथ को गाड़ी पर घूमना बहुत पसन्द था| जब कोई पूछता बड़े हो कर क्या बनोगे तो मासूमियत से कहते कोचवान बनूँगा|

बालक की आकृति एवं रूप बहुत कुछ उनके सन्यासी पितामह दुर्गादास की तरह था|परिवार के लोगों ने बालक का नाम दुर्गादास रखने की इच्छा प्रकट की किन्तु माता द्वारा देखे स्वपन के आधार पर बालक का नाम वीरेश्वर रखा गया| प्यार से लोग ‘बिले’ कह कर बुलाते थे|हिन्दू मान्यता के अनुसार संतान के दो नाम होते हैं एक राशी का एवं दूसरा जन साधारण में प्रचलित नाम तो अन्नप्रासन के शुभ अवसर पर बालक का नाम नरेन्द्र नाथ रखा गया|नरेन्द्र की बुद्धी बचपन से ही तेज थी|बचपन में नरेन्द्र बहुत नटखट थे| भय फटकार या धमकी का असर उन पर नहीं होता था| तो माता भुवनेश्वरी देवी ने अदभुत उपाय सोचा नरेन्द्र का अशिष्ट आचरण जब बढ जाता तो वो शिव-शिव कह कर उनके ऊपर जल डाल देतीं|बालक नरेन्द्र एकदम शान्त हो जाते इसमे संदेह नही की बालक नरेन्द्र शिव का ही रूप थे|

“उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये|”

स्वामी जी की शिक्षा –

दोस्तों 1871 में 8 साल की आयु में आपको ईस्वर चन्द्र विद्यासागर  मेट्रोपोलिटन इंस्टिट्यूट में डाला गया| 1877 में जब उनका परिवार रायपुर स्थापित हुआ तब तक नरेंद्र ने उस स्कूल से शिक्षा ग्रहण की| 1879 में, उनके परिवार के कलकत्ता वापिस आ जाने के बाद प्रेसीडेंसी कॉलेज की एंट्रेंस परीक्षा में फर्स्ट डिवीज़न लाने वाले वे पहले विद्यार्थी बने| वे विभिन्न विषयो जैसे दर्शन शास्त्र, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञानं, कला और साहित्य के उत्सुक पाठक थे| हिंदु धर्मग्रंथो में भी उनकी बहोत रूचि थी जैसे वेद, उपनिषद, भगवत गीता, रामायण, महाभारत और पुराण| नरेंद्र भारतीय पारंपरिक संगीत में निपुण थे, और हमेशा शारीरिक योग, खेल और सभी गतिविधियों में सहभागी होते थे|

आपने  पश्चिमी तर्क, पश्चिमी जीवन और यूरोपियन इतिहास की भी पढाई जनरल असेंबली इंस्टिट्यूट से कर रखी थी| 1881 में, उन्होंने ललित कला की परीक्षा पास की, और 1884 में कला स्नातक की डिग्री पूरी की|इतना ही नही आपने  David Hume, Immanuel Kant, Johann Gottlieb Fichte, Baruch Spinoza, Georg W.F. Hegel, Arthur Schopenhauer, Auguste Comte, John Stuart Mill और Charles Darwin के कामो का भी अभ्यास कर रखा थ| वे Herbert Spencer के विकास सिद्धांत से मन्त्र मुग्ध हो गये थे और उन्ही के समान वे बनना चाहते थे, उन्होंने Spencer की शिक्षा किताब (1861) को बंगाली में भी परिभाषित किया| जब वे पश्चिमी दर्शन शास्त्रियों का अभ्यास कर रहे थे तब उन्होंने संस्कृत ग्रंथो और बंगाली साहित्यों को भी पढ़ा|

“ब्रह्माण्ड कि सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं| वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है”

William Hastie (जनरल असेंबली संस्था के अध्यक्ष) ने ये लिखा की, “नरेंद्र सच में बहोत होशियार है, मैंने कई यात्राये की बहोत दूर तक गया लेकिन मै और जर्मन विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र के विद्यार्थी भी कभी नरेंद्र के दिमाग और कुशलता के आगे नहीं जा सके”|

मृत्यु –

4 जुलाई 1902 (उनकी मृत्यु का दिन) को विवेकानंद सुबह जल्दी उठे, और बेलूर मठ के पूजा घर में पूजा करने गये और बाद में 3 घंटो तक योग भी किया| उन्होंने छात्रो को शुक्ल-यजुर-वेद, संस्कृत और योग साधना के विषय में पढाया, बाद में अपने सहशिष्यों के साथ चर्चा की और रामकृष्ण मठ में वैदिक महाविद्यालय बनाने पर विचार विमर्श किये| 7 P.M. को विवेकानंद अपने रूम में गये, और अपने शिष्य को शांति भंग करने के लिए मना किया, और 9 P.M को योगा करते समय उनकी मृत्यु हो गयी|उनके शिष्यों के अनुसार, उनकी मृत्यु का कारण उनके दिमाग में रक्तवाहिनी में दरार आने के कारन उन्हें महासमाधि प्राप्त होना है| उनके शिष्यों के अनुसार उनकी महासमाधि का कारण ब्रह्मरंधरा (योगा का एक प्रकार) था|उन्होंने अपनी भविष्यवाणी को सही साबित किया की वे 40 साल से ज्यादा नहीं जियेंगे| बेलूर की गंगा नदी में उनके शव को चन्दन की लकडियो से अग्नि दी गयी|

स्वामी विवेकानंद जी –

“उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो , तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो , तुम तत्व  नहीं हो , ना ही शरीर हो , तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो”|

“अगर धन दूसरों की भलाई  करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है”|

“एक शब्द में, यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो”|

“वेदान्त  कोई  पाप  नहीं  जानता , वो  केवल  त्रुटी  जानता  है और  वेदान्त कहता है  कि  सबसे  बड़ी  त्रुटी  यह कहना  है  कि तुम  कमजोर  हो , तुम  पापी  हो , एक  तुच्छ  प्राणी हो , और  तुम्हारे  पास  कोई  शक्ति  नहीं  है  और  तुम  ये  वो  नहीं  कर  सकते”|

दोस्तों आप सभी ने अच्छे से स्वामी जी के बारे में जाना और समझा अगर आप भी एक अच्छे व्यक्ति बनना चाहते है तो आपको स्वामी जी के सुविचारो से सीख जरुर लेनी चाहिए|अब मै समझ सकता हु आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा और अगर आप इसे अपने जीवन में उतरेंगे तो जरुर आप भी अच्छे व्यक्ति बन सकते है|

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