Hypothermia ka Upchar aur kaise bache

दोस्तों, Hypothermia के बारे में आप सभी जानते हैं ये एक तरह की बीमारी है जब शरीर का तापमान 95 डिग्री से कम हो जाए या शरीर की गर्मी पैदा करने की क्षमता कम होने लगे तो हायपोथर्मिया होता है|ठंड के मौसम में बूढ़े लोगो में और नवजात बच्चों में Hypothermia का खतरा बढ़ जाता है|बूढ़ों में डायबिटीज, सर्दी- जुकाम की दवाओं के अधिक सेवन और बढ़ती उम्र की वजह से सर्दी को रोकने की क्षमता कम हो जाती है|नवजात  में सर्दी रोकने क्षमता का पूरा विकास नहीं हुआ होता है|उसे सांस लेगने में भी परेशानी हो सकती है|इसलिए उम्रदराज व नवजात में तापमान की थोड़ी सी गिरावट से भी हायपोथर्मिया हो सकता है|

आपको बताये उम्रदराज लोगों को हाइपोथर्मिया का खतरा ज़्यादा हो सकता है, क्योंकि डायबिटीज़ आदि बीमारियों की वज़ह से उनका शरीर ठंड को झेल पाने में कम सक्षम होता है|सीधे दवा विक्रेता से दवा लेकर सर्दी-जुकाम का इलाज करना भी इसका कारण बन सकता है|उनमें यह लक्षण दिखाई दे, तो वह हाईपोथर्मिया का शिकार हैं|धीमे बोलना, उनिंदापन या भ्रम की स्थिति, बाजुओं और टांगों का कांपना या जकड़न, शारीरिक गतिविधियों पर उचित नियंत्रण न होना, धीमी प्रतिक्रिया या कमजोर नब्ज आदि इसके कुछ कारण हैं|

Hypothermia का उपचार

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Hypothermia से बचाव कैसे करें –

  • दोस्तों घर का माहौल गर्म बनाए रखें|थर्मोस्टेट 68 से 70 डिग्री तक बनाए रखें|60 से 65 डिग्री तक के माहौल में उम्रदराज लोगों में हाइपोथर्मिया हो सकता है|
  • टांगों और कंधों को गर्म रखने के लिए कंबल का प्रयोग करें और घर के अंदर सिर पर हैट या टोपी पहन कर रखें|
  • ठंड में बाहर जाते समय, टोपी, स्कार्फ और दस्ताने ज़रूर पहनें, ताकि शरीर की गर्मी कम न हो| सिर को ढकना बेहद आवश्यक है, क्योंकि ज़्यादातर गर्मी सिर के जरिए बाहर जा सकती है|
  • गर्मी को शरीर के अंदर बनाए रखने के लिए गर्म ढीले कपड़ों की कई परतें पहन कर रखें|ध्यान दें, जो दवाएं आप अपनी मरजी से ले रहे हैं क्या वह हाईपोथर्मिया का खतरा तो नहीं बढ़ा रही|याद रखें, कंपकपी के बिना हाइपोथर्मिया बुरा संकेत होता है|

Hypothermia का उपचार –

Hypothermia का उपचार

प्राथमिक उपचार के तौर पर मरीज को सबसे पहले बंद गर्म कमरे में लेटा दें|उसके गीले कपड़े उतार दें, गर्म कपड़ों की परतें उन्हें पहना दें, इसके बाद गर्म कम्प्रैस या इनसुलेशन का प्रयोग करें|ध्यान रहे आपको ऐसे में सीधे हीट का प्रयोग नही करना है|

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  • प्राथमिक उपचार के तौर पर बीमार बच्चे को सबसे पहले बंद, गर्म कमरे में लेटा दें|
  • उसके कपड़े यदि गीले हो तो बदल दे|
  • गर्म कपड़ों की परतें उन्हें पहना दें|
  • जिस भी तरह से बच्चे को गर्मी दिया जा सके ,उसे देने की कोशिश करे|
  • बच्चा यदि छोटा हैं तो उससे अपने गोद में लेकर ,कम्बल आदि में लपेटकर उससे गर्मी देने की कोशिश करें|
  • जाड़े के मौसम में बाहर जाते समय अपने बच्चे को टोपी दास्तानें जरूर पहनाये|
  • ज्यादा ठंड पड़ने और हवा वाले दिनों में बच्चे को घर के अंदर ही रखे और उससे गर्मी देने की कोशिश करें|
  • जरूरत पड़ने पर बाहर जाना पड़े, तो ज़्यादा से ज़्यादा गर्म कपड़े पहनाये, ताकि शरीर मे गर्मी बनी रहे|
  • जाड़े में अपने बच्चे को कई कपड़े पहनाये|इससे गर्मी परतों में बंद रहेगी|बच्चे को कसे कपड़े न पहनाये,  इससे ब्लड सरर्कुलेशन में रुकावट हो सकती है|
  • सर्दी जुकाम की दवाएं भी समस्या पैदा कर सकती हैं|
  • अपने बच्चे का वजन सामान्य बनाए रखने के लिए पोषण युक्त भोजन दें|उचित भोजन के अभाव में चर्बी कम हो जायेंगी और शरीर का तापमान और भी कम हो जायेगा|

लक्षण –

  • इस स्थिती में बच्चे के हाथ सही से काम नहीं करते|
  • इस दौरान सबसे अधिक तकलीफ बच्चे के पेट में होती है और वह थकान महसूस करता है|
  • इस बीमारी में धीरे बोलना,अत्यधिक नींद आना, कंपकंपी लगना,हाथों और पैरों  में जकड़न, शरीर पर अपना वश न पता लगना, रिस्पांस देने में देर लगना या नब्ज का कमजोर लगना  जैसे लक्षणों के रूप में दिखाई पड़ती है|
  • जब बच्चे के शरीर का तापमान गिरता है, तो उसका हार्ट, नर्वस सिस्टम  और दूसरे अंग सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते हैं|अगर इस बीमारी को अनदेखा कर दिया जाए, तो यह हार्ट और सांस प्रणाली के फेल होने का कारण बन सकता है|

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दोस्तों इस तरह आज आप सभी ने जाना कि Hypothermia एक सामान्य बीमारी है जो आसानी से घरेलू उपचार से ठीक कर सकते हैं|अगर आपको मेरा ये पोस्ट पसंद आया हो तो नीचे comment कर जरुर बताये|अगर आपको इससे जुडी कोई जानकारी देनी है तो comment box में बता सकते हैं|

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