कृष्ण जन्माष्टमी 2017 की Date और पूरी जानकारी

[Krishna Janmashtami] दोस्तों, पूरी दुनिया भगवान् श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करता है और हमारे चितचोर प्रभु को सभी बहुत प्यार करते हैं|शायद कोई हो जिसे माखनचोर न पसंद हों|आप सभी जानते हैं श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्स्व है| जन्माष्टमी हमारे देश में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं इसमें कोई संसय नही है|भगवान् कृष्ण ने अपना अवतार श्रावण माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया|आपको बताये भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं|इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति रंगों से सराबोर हो उठती है और लोकगीतों के साथ ये त्यौहार पुरे विश्व में मनाया जाता है|आपको बताये इस बार यानि 2017 में हम सभी 14 अगस्त दिन सोमवार को मनाएंगे|

कृष्ण जन्माष्टमी

भये प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी

हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी

लोचन अभिरामा तनु घनश्यामा निज आयुध भुज चारी

भूषण बन माला नयन बिशाला शोभा सिन्धु खरारी|

कह दुई कर जोरी अस्तुति तोरी केही बिधि करो अनंता

माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुराण भनंता

करुना सूख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता

सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता

ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रों प्रति बेद कहै

मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै

उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै

कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै|

कृष्ण जन्माष्टमी 2017

माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा

कीजै सिसुलीला अति प्रियशीला यह सुख परम अनूपा

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा

यह चरित जे गावहिं हरि पद पावहिं ते न परहिं भवकूपा

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दोस्तों श्री कृष्ण वसुदेव तथा देवकी की आठवी संतान थे|परंतु श्री कृष्ण के जन्म के तुरंत बाद वसुदेव जी उन्हे कंस से सुरक्षित रखने के लिए अपने मित्र नन्द बाबा के घर छोड़ आये थे|आपको बताये इसलिए श्री कृष्ण का लालन पोषण नन्द बाबा तथा यशोदा मैया ने किया|उनका सारा बचपन गोकुल मे बीता|उन्होने अपनी बचपन की लीलाए गोकुल मे ही रचाई तथा बड़े होकर अपने मामा कंस का वध भी किया|

आप सभी जानते हैं श्री कृष्ण का जन्म वसुदेव तथा देवकी के घर रात्री 12 बजे हुआ था|इसलिए पूरे भारत मे कृष्ण जन्म को रात्री मे ही 12 बजे मनाया जाता है|हर साल भादव मास की अष्टमी के दिन रात्रि मे 12 बजे हर मंदिर तथा घरो मे प्रतीक के रूप मे लोग श्री कृष्ण का जन्म करते है|जन्म के बाद उनका दूध, दही तथा शुध्द जल से अभिषेक करते है, तथा माखन मिश्री, पंजरी तथा खीरा ककड़ी का भोग लगाते है|तत्पश्चात कृष्ण जी की आरती करते है, कुछ लोग खुशी मे रात भर भजन कीर्तन करते तथा नाचते गाते है|बहुत से लोग व्रत भी रखते हैं और जब भगवान् का प्राकट्य हो जाता है तो अन्न जल ग्रहण करते हैं|

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दोस्तों वैसे तो पूरे भारत मे श्री कृष्ण जन्म उत्सव बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है परंतु गोकुल, मथुरा, वृन्दावन श्री कृष्ण की लीलाओ के प्रमुख स्थान थे|इसलिए यहा पर इस दिन का उल्लास देखने लायक होता है|मंदिरो मे पूजा अर्चना, मंत्रो उच्चार, भजन कीर्तन किए जाते है|इस दिन मंदिरो की साज सज्जा भी देखने लायक होती है|श्री कृष्ण के भक्त भी यही चाहते है, इस दिन कान्हा के दर्शन इन जगहो पर हो जाये|

अब मै उम्मीद के साथ कह सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा अगर आप मेरे द्वारा लिखे हुए इस पोस्ट को अच्छे से पढ़े होंगे तो आप सभी को ये आर्टिकल जरुर पसंद आया होगा|अगर आप कुछ पूछना चाहते हैं तो नीचे message के द्वारा पूंछ सकते हैं|लेकिन एक बात आप सभी को बताना चाहूँगा कि भगवान् श्री कृष्ण के जैसा इस श्रृष्टि में और दूसरा कोई नही है इसलिए आप सभी को माखन चोर की जरुर स्तुति करनी चाहिए|

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