Menstrual Cycle In Hindi

दोस्तों हम सभी जानते हैं पीरियड जिसे आम बोल चाल के भाषा में माहवारी और मासिक-धर्म के नाम से भी जानते है|भगवान् के द्वारा पुरुष और स्त्रियो में कई विषमताएं बनायीं गयी है इन्हीं विषमताओं में से एक हैं स्त्रियों में मासिक-धर्म|हमारे समाज में कई लोगो को यह जानने की खासी उत्सुकता रहती है की लड़कियों में मासिक धर्म कब और कैसे शुरू होता है|आज हम माहवारी से जुड़े ऐशे कई अनसुलझे सवालो के जवाब बताने जा रहे हैं जिनके बारे में आपको पहले से नहीं पता होगा|

हम सभी जानते हैं 10 से 15 साल की आयु की लड़की के अंडाशय हर महीने एक विकसित डिम्ब उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं|वह अण्डा अण्डवाहिका नली के द्वारा नीचे जाता है जो कि अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है|जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है|ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आप सभी को मासिक धर्म से जुडी कुछ जानकारी साझा करने जा रहा हूँ उम्मीद है आपको बेहद पसंद आएगा|

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मासिक धर्म क्या होता है –

दोस्तों जैसा कि मैंने आपको बताया कि मासिक धर्म लड़कियों में आता है जो कि हर महीने आता है सभी जानते हैं|जिसे माहवारी भी कहा जाता है|महिलाओ में होने वाली सामान्य शारीरिक गतिविधि है|महिलाओं को भी माहवारी के दौरान खुद अपने शरीर को समझने में परेशानी आती है|जब कोई लड़की पैदा होती है, तो उसके अण्‍डाशयों में पहले से लाखों अपरिपक्‍व अण्‍डाणु मौजूद होते हैं|जवान होने पर, उनमें से दसियों अण्‍डे महीने में एक बार हार्मोन उत्तेजित होने की वजह से विकसित होने शुरू हो जाते है|महिलाओं के शरीर में चक्रीय हार्मोस में होने वाले बदलावों की वज़ह से गर्भाशय से नियमित तौर पर ख़ून और अंदरुनी हिस्से से स्राव होना मासिकधर्म कहलाता है|


आपको बताना चाहूँगा आमतौर पर प्रत्‍येक चक्र के दौरान अण्‍डाशय में केवल एक ही अण्‍डा परिपक्‍व होता है और गर्भाशय में छोड़ा जाता है उसी समय, गर्भावस्‍था की तैयारी में गर्भाशय का भीतरी हिस्सा मोटा होना शुरू हो जाता है|यदि यह अण्‍डाणु निषेचित नहीं होता, तो यह गर्भाशय के भीतरी हिस्से के अतिरिक्‍त ऊतकों के साथ माहवारी ख़ून के रूप में योनि से निकलना शुरू हो जाता है|इसके बाद अगला माहवारी चक्र फिर से शुरू हो जाता है|

मासिक का समय क्या होता है –

आपको बताये माहवारी शुरू होने और बंद होने का कोई निश्चित उम्र शीमा नहीं है|यह स्त्री विशेष में क्षेत्रीय वातावरण और रहन सहन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है|अमूमन माहवारी के शुरू होने की जो सामान्य समय शीमा है वह 11-12 वर्ष है|अधिकतर महिलाओं की प्राकृतिक रज्‍जोनिवृत्ति यानि की माहवारी बंद 45-55 वर्ष की आयु में हो जाती है|इस आयु में, माहवारी आना हमेशा के लिए बंद हो जाती है और इसके बाद महिलाएं बच्‍चे पैदा करने में सक्षम नहीं रहती|

मासिक धर्म से जुडी परेशानी –

आपको बताना चाहूँगा ज्यादातर महिलाएं माहवारी की समस्याओं से परेशान रहती है लेकिन अज्ञानतावश या फिर शर्म या झिझक के कारण लगातार इस समस्या से जूझती रहती है|दरअसल दस से पन्द्रह साल की लड़की के अण्डाशय हर महीने एक परिपक्व अण्डा या अण्डाणु पैदा करने लगता है|वह अण्डा डिम्बवाही थैली में संचरण करता है जो कि अण्डाशय को गर्भाशय से जोड़ती है|जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है तो रक्त एवं तरल पदाथॅ से मिलकर उसका अस्तर गाढ़ा होने लगता है|

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यह तभी होता है जब कि अण्डा उपजाऊ हो, वह बढ़ता है अस्तर के अन्दर विकसित होकर बच्चा बन जाता है|गाढ़ा अस्तर उतर जाता है और वह माहवारी का रूधिर स्राव बन जाता है जो कि योनि द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है|जिस दौरान रूधिर स्राव होता रहता है उसे माहवारी अवधि कहते हैं|औरत के प्रजनन अंगों में होने वाले बदलावों के आवर्तन चक्र को माहवारी चक्र कहते हैं| यह हॉरमोन तन्त्र के नियन्त्रण में रहता है एवं प्रजनन के लिए जरूरी है|माहवारी चक्र की गिनती रूधिर स्राव के पहले दिन से की जाती है क्योंकि रजोधर्म प्रारम्भ का हॉरमोन चक्र से घनिष्ट तालमेल रहता है|माहवारी का रूधिर स्राव हर महीने में एक बार 28 से 32 दिनों के अन्तराल पर होता है|परन्तु महिलाओं को यह याद करना चाहिए कि माहवारी चक्र के किसी भी समय गर्भ होने की सम्भावना है|

निम्नलिखित उपचार हो सकता है कि आपको पर्चे पर लिखी दवाओं से बचा सकें|अपने उदर के निचले भाग गर्म सेक करें|ध्यान रखें कि सेंकने वाले पैड को रखे-रखे सो मत जाएं|गर्म जल से स्नान करें|गर्म पेय ही पियें|निचले उदर के आसपास अपनी अंगुलियों के पोरों से गोल गोल हल्की मालिश करें|सैर करें या नियमित रूप से व्यायाम करें और उसमें श्रोणी को घुमाने वाले व्यायाम भी करें|साबुत अनाज, फल और सब्जियों जैसे मिश्रित कार्बोहाइड्रेटस से भरपूर आहार लें पर उसमें नमक, चीनी, मदिरा एवं कैफीन की मात्रा कम हो|हल्के परन्तु थोड़े-थोड़े अन्तराल पर भोजन करें| ध्यान अथवा योग जैसी विश्राम परक तकनीकों का प्रयोग करें|नीचे लेटने पर अपनी टांगे ऊंची करके रखें या घुटनों को मोड़कर किसी एक ओर सोयें|

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दोस्तों इस तरह आज आप सभी ने जाना कि मासिक धर्म क्या है और इससे कैसे निजाद मिलती है और इसका समय क्या है|अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा|अगर आपको कुछ पूछना हो तो आप नीचे message box में comment कर बता सकते हैं|अगर आपको मेरा ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो हमे जरुर बताये|

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