नवरात्री की Date और पूरी जानकारी

दोस्तों, हमारे भारतवर्ष में सबसे प्रसिद्द और प्रचलित त्योहारों की श्रेणी में नवरात्री का त्यौहार मन जाता है और सभी हिन्दू इसको बड़े श्रद्धा भाव से इस त्यौहार को मनाते हैं और व्रत रखते हैं|आपको बताऊ बहुत से लोग search करते हैं नवरात्री कब है या नवरात्री की date. आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको कुछ नवरात्री के बारे में बताने जा रहा हूँ साथ ही आपको बता दू इस बार यानि 2017 में नवरात्री का शुभारम्भ 21 सितम्बर से शुरू हो रहा है और 30 सितम्बर को समापन होगा|इसमें हम सभी नौ दिन देवी माता के नौ रूपों और नवदुर्गा की पूजा करते हैं|आइये जानते हैं माता के नौ रूप कौन कौन से हैं|वैसे आप सभी जानते हैं की पूजा विधि क्या है नहीं जानते तो मै आपको नीचे इसके बारे में भी बाते करूँगा|

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नवरात्री date और पूरी जानकारी

माँ दुर्गा के नौ रूप –

  • शैलपुत्री|
  • ब्रम्हचारिणी|
  • चंद्रघंटा|
  • कूष्मांडा|
  • स्कन्दमाता|
  • कात्यायनी|
  • कालरात्रि|
  • महागौरी|
  • सिद्धिदात्री|

दोस्तों आप सभी जानते हैं कि ये नौ रूप माँ के है और इन्ही की पूजा हम सभी करते हैं|शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नौमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है|सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की|तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा|आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है|माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है|ये सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली हैं|इनका वाहन सिंह है और कमल पुष्प पर ही आसीन होती हैं|नवरात्रि के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है|

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नवरात्री date और पूरी जानकारी

दोस्तों नवदुर्गा और दस महाविद्याओं में माँ काली ही प्रथम प्रमुख हैं|भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य, दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दसमहाविद्या अनंत सिद्धियाँ प्रदान करने में समर्थ हैं|दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति हैं, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं|देवता, मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु हैं, इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है। सभी देवता, राक्षस, मनुष्य और गन्धर्व इनकी कृपा-प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं|इसी लिए आपको बताना चाहता हूँ माँ ही सर्वोपरि हैं|

दुर्गापूजा –

दोस्तों आपको बताये चौमासे में जो कार्य स्थगित किए गए होते हैं, उनके आरंभ के लिए साधन इसी दिन से जुटाए जाते हैं|क्षत्रियों का यह बहुत बड़ा पर्व है। इस दिन ब्राह्मण सरस्वती-पूजन तथा क्षत्रिय शस्त्र-पूजन आरंभ करते हैं| विजयादशमी या दशहरा एक राष्ट्रीय पर्व है यानि अर्श्विन शुक्ल दशमी को सायंकाल तारा उदय होने के समय ‘विजयकाल’ रहता है|यह सभी कार्यों को सिद्ध करता है|आश्विन शुक्ल दशमी पूर्वविद्धा निषिद्ध, परविद्धा शुद्ध और श्रवण नक्षत्रयुक्त सूर्योदयव्यापिनी सर्वश्रेष्ठ होती है|अपराह्न काल, श्रवण नक्षत्र तथा दशमी का प्रारंभ विजय यात्रा का मुहूर्त माना गया है|

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इतना ही नही दुर्गा-विसर्जन, अपराजिता पूजन, विजय-प्रयाग, शमी पूजन तथा नवरात्र-पारण इस पर्व के महान कर्म हैं| इस दिन संध्या के समय नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है|आपको बताये क्षत्रिय इस दिन प्रातः स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर संकल्प मंत्र लेते हैं|इसके पश्चात देवताओं, गुरुजन, अस्त्र-शस्त्र, अश्व आदि के यथाविधि पूजन की परंपरा है।नवरात्रि के दौरान कुछ भक्तों उपवास और प्रार्थना, स्वास्थ्य और समृद्धि के संरक्षण के लिए रखते हैं|भक्त इस व्रत के समय मांस, शराब, अनाज, गेहूं और प्याज नही खाते|नवरात्रि और मौसमी परिवर्तन के काल के दौरान अनाज आम तौर पर परहेज कर दिया जाते है क्योंकि मानते है कि अनाज नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता हैं|नवरात्रि आत्मनिरीक्षण और शुद्धि का अवधि है और पारंपरिक रूप से नए उद्यम शुरू करने के लिए एक शुभ और धार्मिक समय है|

नवरात्री date और पूरी जानकरी

दोस्तों इस तरह पूरे नौ दिन भारत में एक अलग ही वातावरण रहता है|अब मै समझ सकता हूँ आप सभी को मेरा ये पोस्ट बहुत अच्छा लगा होगा अगर आप मेरे द्वारा लिखे इस पोस्ट को अच्छे से पढ़े होंगे तो उम्मीद है आप सभी को बहुत अच्छा लगा होगा|अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे message के द्वारा आप पूछ सकते हैं|

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