Tag Archives: निर्गुण भक्तिधारा

हिंदी साहित्य के लेखकों के नाम और पूरी जानकारी

दोस्तों,हिंदी भारत और विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है|उसकी जड़ें प्राचीन भारत की संस्कृत भाषा में तलाशी जा सकती हैं|परंतु हिन्दी साहित्य की जड़ें मध्ययुगीन भारत की ब्रजभाषा, अवधी, मैथिली और मारवाड़ी जेसी भाषाओं के साहित्य में पाई जाती हैं|हिंदी में गद्य का विकास बहुत बाद में हुआ और इसने अपनी शुरुआत कविता के माध्यम से जो कि ज्यादातर लोकभाषा साथ प्रयोग कर विकसित की गई|हिंदी में तीन प्रकार का साहित्य मिलता है|गद्य, पद्य और चम्पू|

आपको बताये हिंदी की पहली रचना कौन सी है इस विषय में विवाद है लेकिन ज़्यादातर साहित्यकार देवकीनंदन खत्री द्वारा लिखे गये उपन्यास चंद्रकांता को हिन्दी की पहली प्रामाणिक गद्य रचना मानते हैं|आज इस पोस्ट के माध्यम से मै आपको हिंदी साहित्य के बारे में बताने जा रहा हूँ साथ ही आपको हिंदी साहित्य के लेखकों की सूची और उनकी रचनाओं के बारे में भी आप सभी को अवगत कराता हूँ|आप सभी जानते हैं भारतीय कवि के सामने कोई टिक नही पाया है आइये उनके बारे में विस्तार से जानते हैं|

हिंदी साहित्य के लेखक का नाम

हिंदी साहित्य का इतिहास –

जैसा की आप सभी जानते हैं हिंदी साहित्य का आरंभ आठवीं शताब्दी से माना जाता है|यह वह समय है जब सम्राट हर्ष की मृत्यु के बाद देश में अनेक छोटे-छोटे शासन केंद्र स्थापित हो गए थे|जो परस्पर संघर्षरत रहा करते थे|विदेशी मुसलमानों से भी इनकी टक्कर होती रहती थी|हिंदी साहित्य के विकास को आलोचक सुविधा के लिये पाँच ऐतिहासिक चरणों में विभाजित कर देखते हैं, जो निम्नलिखित हैं और आप सभी जानते हैं पढ़ चुके हैं आइये जानते हैं|

  • आदिकाल|
  • भक्तिकाल|
  • रीतिकाल|
  • आधुनिककाल|
  • नव्योत्तर काल|

आदिकाल के कवि और उनकी रचना –

दोस्तों हिन्दी साहित्य के आदिकाल को आलोचक १४०० इसवी से पूर्व का काल मानते हैं जब हिंदी का उदभव हो ही रहा था|हिन्दी की विकास-यात्रा दिल्ली, कन्नौज और अजमेर क्षेत्रों में हुई मानी जाती है|पृथ्वीराज चौहान का उस समय दिल्ली में शासन था और चंदवरदाई नामक उसका एक दरवारी कवि हुआ करता था|चंदवरदाई की रचना ‘पृथ्वीराजरासो है|जिसमें उन्होंने अपने मित्र पृथ्वीराज की जीवन गाथा कही है|पृथ्वीराज रासो हिंदी साहित्य में सबसे बृहत् रचना मानी गई है|

हिंदी साहित्य के लेखक

चंदवरदाई – पृथ्वीराज रासो|

इसे भी पढ़ें – A love story in hindi.

भक्तिकाल –

दोस्तों भक्तिकाल भक्ति भावना से परिपूर्ण था इस काल में दो काव्य धाराएँ थी –

निर्गुण भक्तिधारा|

सगुण भक्तिधारा|

निर्गुण भक्तिधारा की दो शाखाएं थी –

ज्ञानाश्रयी और प्रेमाश्रयी|

ज्ञानाश्रयी –

प्रमुख कवि – कवीर, नानक, रैदास, दादूदयाल, मकूल्दास, सुन्दरदास, धरमदास|

प्रेमाश्रयी (सूफी काव्य) –

प्रमुख कवि – मालिक मोहम्मद जायसी, कुतबन, मंझन, शेख नबी, कासिम शाह, नूर मोहम्मद आदि|

सगुण भक्तिधारा –

सगुण भक्तिधारा में भी दो शाखाएं थी –

रामाश्रयी और कृष्णाश्रयी|

रामाश्रयी के कवि –

हिंदी साहित्य के लेखक

तुलसीदास, केशवदास, नाभादास, अग्रदास आदि|

कृष्णाश्रयी के प्रमुख कवि –

सूरदास, नंददास, कुम्भनदास, मीरा, रसखान, रहीम|

कबीरदास, मालिक मुहम्मद जायसी, सूरदास और तुलसीदास|

रीतिकाल –

दोस्तों हिंदी साहित्य का रीतिकाल संवत १७०० से १९०० तक माना जाता है यानी १६४३ई० से १८४३ई० तक|रीति का अर्थ है बना बनाया रास्ता या बंधी-बंधाई परिपाटी|इस काल को रीतिकाल कहा गया क्योंकि इस काल में अधिकांश कवियों ने श्रृंगार वर्णन, अलंकार प्रयोग, छंद बद्धता आदि के बंधे रास्ते की ही कविता की|हालांकि घनानंद, बोधा, ठाकुर, गोबिंद सिंह जैसे रीति-मुक्त कवियों ने अपनी रचना के विषय मुक्त रखे|

इसे भी पढ़ें – हिंदी साहित्य की प्रथम कहानी और उनके लेखक का नाम|

केशव, बिहारी, भूषन, मतिराम, घनानंद, सेनापति आदि|

आधुनिककाल –

आपको बताना चाहूँगा आधुनिककाल हिंदी साहित्य पिछली दो सदियों में विकास के अनेक पड़ावों से गुज़रा है|जिसमें गद्य तथा पद्य में अलग अलग विचार धाराओं का विकास हुआ|जहां काव्य में इसे छायावादी युग, प्रगतिवादी युग, प्रयोगवादी युग और यथार्थवादी युग इन चार नामों से जाना गया, वहीं गद्य में इसको, भारतेंदु युग, द्विवेदी युग, रामचंद शुक्ल और प्रेमचंद्र युग|दोस्तों इस युग को अद्यतन युग के नाम से भी जाना जाता है|

हिंदी साहित्य के लेखक का नाम

वैसे आप सभी जानते हैं अद्यतन युग के गद्य साहित्य में अनेक ऐसी साहित्यिक विधाओं का विकास हुआ जो पहले या तो थीं ही नहीं या फिर इतनी विकसित नहीं थीं कि उनको साहित्य की एक अलग विधा का नाम दिया जा सके|

जैसे – डायरी, या‌त्रा विवरण, आत्मकथा, रूपक, रेडियो नाटक, पटकथा लेखन, फिल्म आलेख आदि|

नव्योत्तर काल –

दोस्तों नव्योत्तर काल की कई धाराएं हैं एक, पश्चिम की नकल को छोड़ एक अपनी वाणी पाना; दो, अतिशय अलंकार से परे सरलता पाना; तीन, जीवन और समाज के प्रश्नों पर असंदिग्ध विमर्श|कंप्यूटर के आम प्रयोग में आने के साथ साथ हिंदी में कंप्यूटर से जुड़ी नई विधाओं का भी समावेश हुआ है, जैसे- चिट्ठालेखन और जालघर की रचनाएं|आपको बताये हिन्दी में अनेक स्तरीय हिंदी चिट्टे, जालघर व जाल पत्रिकाएं हैं|

इसे भी पढ़ें – हिंदी के प्रथम कवि का नाम और उनकी रचना|

दोस्तों इस आज आप सभी ने हिंदी साहित्य के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की|साथ ही आप सभी ने कवि और उनकी रचनाओं को भी अच्छे से जाना|अगर आप सभी ने अच्छे से मेरे इस पोस्ट को read किया होगा तो आपको जरुरी जानकारी मिल गयी होगी|अगर आपको मेरा ये पोस्ट पसंद आया हो तो नीचे comment कर जरुर बताये साथ ही अगर आपको कुछ पूछना हो तो नीचे comment box में बता सकते हैं|