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खुशियाँ बाँटने से बढती हैं

खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं (भावुक कहानी)

दोस्तों, हम सभी आज बहुत उदास से रहते हैं और ऐसे में बहुत से लोग तनाव का शिकार हो जाते हैं| मै पूछना चाहता हूँ ऐसा क्यों है क्यों सभी लोगो का चेहरा लटका हुआ रहता है| आपको मै बताऊ अगर कोई भी आपको उदास दिखे तो कोशिश करना चाहिए कि उसको प्रसन्न कर दे| आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको एक ऐसी कहानी को बताने जा रहा हूँ जो कि बहुत ही प्रसिद्द है और सभी को पसंद भी आयेगी| आज मै आपको एक Emotional story सुनाने जा रहा हूँ जिसका नाम है खुशियाँ बाँटने से बढ़ती है|आइये हम सभी मिलकर पढ़ते हैं|

खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं  (Emotional Story in hindi)

 

मनोज बैंक में एक सरकारी अफसर था| रोज बाइक से ऑफिस जाता और शाम को घर लौट कर आता| शहर में चकाचौंध तो बहुत रहती है लेकिन जीवन कहीं सिकुड़ सा गया है आत्मीयता की भावना तो जैसे किसी में है ही नही बस हर इंसान व्यस्त है खुद की लाइफ में यही सोचता हुआ मनोज ऑफिस से घर की ओर जा रहा था|

खुशियाँ बाँटने से बढती है

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फुटपाथ पर एक छोटी सी डलिया लिए एक बूढी औरत बैठी थी शायद कुछ बेच रही थी| मनोज पास गया तो देखा कि छोटी सी डलिया में वो औरत संतरे बेच रही थी| देखो कैसा जमाना है लोग मॉल जाकर महंगा समान खरीदना पसंद करते हैं कोई इस बेचारी की तरफ देख भी नही रहा मनोज मन ही मन ये बात सोच रहा था|

बाइक रोककर मनोज बुढिया के पास गया और बोला – अम्मा १ किलो संतरे दे दो|बुढ़िया की आँखों में उसे देखकर एक चमक सी आई और तेजी से वो संतरे तौलने लगी| पैसे देकर मनोज ने थैली से एक संतरे निकाला और खाते हुए बोला – अम्मा ये संतरे मीठे नही हैं और ये कहकर उसने एक संतरा बुढ़िया को दिया वो संतरा चखकर बोली – मीठे तो हैं बाबू| मनोज बिना कुछ बोले थैली उठाये चलता बना|

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अब ये रोज का क्रम हो गया| मनोज रोज उस बुढ़िया से संतरे खरीदता और थैली से एक संतरा निकालकर खाता और बोलता अम्मा संतरे मीठे नही हैं और कहकर बचा संतरा अम्मा को देता| बूढी संतरा खाकर बोलती मीठे तो हैं बाबू| बस फिर मनोज थैली लेकर चला जाता| कई बार मनोज की बीबी भी उसके साथ होती थी वो ये सब देखकर बहुत आश्चर्यचकित होती थी| एक दिन उसने मनोज से कहा – सुनो जी ये सारे संतरे रोज इतने मीठे और अच्छे होते हैं फिर भी तुम क्यों रोज उस बेचारी के संतरे की बुराई करते हो|

मनोज हलकी मुस्कान के साथ बोला – उस बूढी माँ के सारे संतरे मीठे ही होते हैं लेकिन वो बेचारी कभी खुद उन संतरों को नही खाती| मैं तो बस ऐसा इसलिए करता हूँ कि वो माँ मेरे संतरे में से एक खा ले और उसका नुक्सान भी न हो|

उनके रोज का यही क्रम पास में सब्जी बेचती मालती भी देखती थी| एक दिन वो बूढ़ी अम्मा से बोली – ये लड़का रोज संतरा खरीदने में कितना चिकचिक करता है| रोज तुझे परेसान करता है फिर भी मैं देखती हूँ कि तू उसको एक संतरा फालतू तौलती है क्यों? बूढ़ी बोली – मालती, वो लड़का मेरे संतरों की बुराई नही करता बल्कि मुझे रोज एक संतरा खिलाता है और उसको लगता है कि जैसे मुझे पता नही है लेकिन उसका प्यार देखकर खुद ही एक संतरा उसके थैली में फालतू चला जाता है|

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दोस्तों, आप सभी लोग विश्वास करें कभी कभी ऐसी छोटी बातो में बड़ा आनंद होता है और मै समझ सकता हूँ आप सभी को ये कहानी बहुत पसंद आई होगी|अगर आपको मेरी ये कहानी अच्छी लगी हो तो निचे message के दद्वारा जरुर बताएं|अगर ऐसी ही कहानियाँ आपको पसंद हो और आप पढना चाहते हैं तो मेरी साईट पर आये आपको बहुत अच्छा लगेगा और भी बहुत साडी जानकारी आपको मिल सकेगी|

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