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शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय

दोस्तों आप सभी जानते है हमारा देश अंग्रेजो की चपेट में था और हम स्वतंत्र बिलकुल नही थे अंग्रेज पूरी तरह से हमारे देश को अपना बनाना चाहते थे|लेकिन ऐसा बिलकुल भी नही हुआ क्युकी हमारा भारतवर्ष न किसी का गुलाम था और न रहेगा|आप सभी जानते है हमारे देश में ऐसे ऐसे देशभक्त हुए जिसने अपने प्राण का मोह न करके भारत को स्वतंत्र किया और शहीद हो गए ऐसे में हमारे सरदार भगत सिंह जी थे|आप सभी भगत सिंह के बारे में भली भांति जानते है और प्रत्येक देश पर्व पर याद भी करते है और श्रधांजलि देते आ रहे है|आज इस आर्टिकल के माध्यम से मै आपको बताने जा रहा हु सरदार भगत सिंह जी का जीवन परिचय|

शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय

महान स्वन्त्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की जिनका जीवन गाथा आज भी हम युवाओ को अपने देश सेवा के लिए प्रेरित करती है|जब हमारा देश आजाद नहीं था तब देश के युवाओ को अपने देश की आज़ादी के लिए एक जूनून सा था| हर किसी को अपने देश को आज़ाद देखना चाहता था जिसके लिए हर कोई अपने देश पर मर मिटने को तैयार था| इसी कड़ी में सरदार भगत सिंह का भी नाम आता है जो मात्र 23 वर्ष की अवस्था में ही देश के लिए शहीद हो गए|अब आइये जानते है की भगत सिंह जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था|

शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय – 

दोस्तों आपको बताये भगत सिंह ऐसे देशभक्त थे जिन्होंने अपना सारा जीवन देश पर ही न्योछावर कर दिया|भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर को पंजाब प्रान्त के बावली गाँव में हुआ था जो की अब पाकिस्तान का हिस्सा है भगत सिंह के पिता किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था| इन्हें देशभक्ति की भावना अपने घर से ही प्राप्त हुआ था जो इनके पिता और चाचा अपने देश के आज़ादी के लिए प्रयास रत थे और इनके दादा जी तो अपने देश की आज़ादी की खातिर इनको ब्रिटिश स्कूल में पढ़ाने से मना कर दिया था जिसके कारण इनकी पढ़ाई गाव के आर्य समाज के स्कूल में हुआ|जब भगत सिंह मात्र 12 साल के थे तभी जलियावाला बाग़ हत्याकांड 1919 में हुआ था| यह वही अवसर था जो की भगत सिंह को अंदर से झकजोर दिया था हजारो निहथ्थे लोगो पर अंग्रेजो द्वारा गोलिया चलायी गयी गर कोई आज भी देखता तो शायद गुस्सा खौल उठता जिसके कारण भगत सिंह भी बहुत क्रोधित हुए और इस घटना की सुचना मिलते ही वे अपने दोस्तों के साथ घर से १२ मील दूर जलियावाला बाग़ पहुच गए और अंग्रेजो के विरोध में हिस्सा लिया|

पूरा नाम                              शहीद भगत सिंह

जन्म                                    27 सितम्बर 1907

जन्म स्थान                           पंजाब प्रान्त के बावली गाँव

माता – पिता                          विद्यावती, सरदार किशन सिंह सिन्धु

मृत्यु                                     23 मार्च 1931लाहौर

शहीद भगत का क्रन्तिकारी जीवन –

शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय

दोस्तों आपको बताये शहीद भगत सिंह बचपन से ही अंग्रेजो के अत्याचारो की कहानी सुनते आ रहे थे जिसके कारण इनके मन में अंग्रेजो के प्रति अपार गुस्सा थी| वे बचपन से ही कांतिकारी देशभक्तो की कहानिया पढ़ते थे और अपने देश को आज़ाद करने की भावना इनके अंदर कूट कूट कर भरी हुई थी शायद वही वह कारण था की वे अंग्रेजो के विरोध में हमेशा बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते  थे|भगतसिंह के जन्म के बाद उनकी दादी ने उनका नाम ‘भागो वाला’रखा था|जिसका मतलब होता है ‘अच्छे भाग्य वाला’| बाद में उन्हें ‘भगतसिंह’ कहा जाने लगा|वह 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओं मेंकार्य करने लगे थे| डी.ए.वी. स्कूल से उन्होंने नौवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की|1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें विवाह बंधन में बांधने की तैयारियां होने लगी तो वह लाहौर से भागकर कानपुर आ गए| फिर देश की आजादी के संघर्ष में ऐसे रमें कि पूरा जीवन ही देश को समर्पित कर दिया|भगतसिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया,वह युवकों के लिए आदर्श बना रहेगा|

जलियावाला बाग़ हत्याकांड –

आपको शायद पता होगा 13 अप्रैल 1919 को जब अंग्रेजो के खिलाफ अमृतसर के जलियावाला भाग में हजारो लोग शांतिपूर्ण तरीके से सभा आयोजित कर रहे थे| तभी क्रूर अंग्रेजो ने हजारो निहत्थे भारतीयों पर गोलिया चलवा दिए जिसके कारण लोग उस सभा से अपने जान बचाने के लिए दीवारों से कूदने लगे और बहुत से लोग तो उस असेम्बली में स्थित कुए में कूदकर अपनी जान बचानी चाही लेकिन गोलियों के आगे आगे प्रयाश बेकार थे| इस तरह हजारो लोगो को बिन मौत अपनी जान गवानी पड़ी जो की अंग्रेजो की क्रूरता को दर्शाती है|आज भी उन गोलियों के निशान जलियावाला बाग़ में देखे जा सकते है जो की इतिहास को हमारे आखो के सामने ला देता है|पूरे इतिहास में मौत का मंजर का ऐसा नही खेला गया हो जो की अंग्रेजो के क्रूरता की बर्बर निशानी है उस बाग़ की दीवारे आज भी उस क्रूरता की चीखे सुनाती है जो की किसी का भी दिल पिघला सकती है|

यह वही वक़्त था जिसके कारण भारत के सभी नागरिको में अंग्रेजो के प्रति गुस्सा भर गया था हर कोई अब अंग्रेजो से बदला लेना चाहता था जिसके कारण भगत सिंह का भी खून खौल उठा था|उस समय महात्मा ग़ांधी जी ने अंग्रेजो के खिलाफ असहयोग आंदोलन चला रहे थे ग़ांधी जी को विश्वास था की अहिंसा के जरिये देश को आज़ादी मिल सकती है| लेकिन चौरा चौरी काण्ड के बाद गाँधी जी ने अपना असहयोग आंदोलन बन्द कर दिया जिसके चलते लाखो नौजवानों ने अपने देश की आज़ादी के लिए क्रन्तिकारी मार्ग चुनना ही पसंद किया|जिसके कारण भगत सिंह  भी ने भी आज़ादी के लिए हिंसा का रास्ता चुन लिया और गोली बन्दुक के दम पर अंग्रेजो से  बदला लेने लगे|

”सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजुए-क़ातिल में है”|

दोस्तों इस तरह आपने अपने देश के लिए बहुत कुछ किया और करते करते अपने प्राण त्याग दिए|आज भी आप अमर है और इतिहास में आपका नाम अटल हो गया|मै समझ सकता हु आप सभी को मेरा ये पोस्ट अच्छा लगा होगा और अगर आपने अच्छे से फॉलो किया होगा तो बहुत जानकारी मिली होगी|आप मेरे वेबसाइट पर और भी बहुत से पोस्ट रीड कर सकते है|आपके लिए बहुत beneficial साबित हो सकता है|

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